अब मेडिकल कॉलेज में प्लेटलेट्स, प्लाज्मा अलग करने की सुविधा
- एफरेसिस मशीन स्थापित, महानगरों के चक्कर लगाने से मिलेगी मुक्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अब जरूरतमंदों को प्लेटलेट्स, प्लाज्मा व स्टेमसेल के लिए महानगरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा इकाई ओपेक अस्पताल कैली में एफरेसिस मशीन स्थापित की गई है। इस मशीन के माध्यम से खून निकालने के बजाय जरूरत पर प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और स्टेमसेल निकाला जा सकता है। रक्तदाता माह में दो बार और साल में 20 बार प्लेटलेट्स दान कर सकता है।
ओपेक अस्पताल में भर्ती एनिमिक गर्भवती को एफरेसिस मशीन से तैयार प्लेटलेट्स चढ़ाया गया। इससे पहले एक डेंगू मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाया जा चुका है। एक पखवाड़े पहले स्थापित एफरेसिस मशीन से प्लेटलेट्स निकलवाने के लिए आठ हजार रुपये देने होंगे।
ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. स्वराज शर्मा ने बताया कि जिले का यह पहला एफरेसिस मशीन है। इसके तमाम फायदे हैं। इससे रक्त के बजाय प्लेटलेट्स, प्लाजमा व स्टेमसेल निकालकर जरूरतमंद को लगाया जा सकेगा।
---
यह है फायदा
डॉ. भाष्कर शर्मा ने बताया कि एफरेसिस मशीन से प्लेटलेट्स के संक्रमण का खतरा नहीं रहता है। सामान्य में आठ-10 डोनर की जगह मशीन से एक ही डोनर से लिया जाता है ब्लड। सामान्य प्रक्रिया में रक्त रोग ग्रस्त पाए जाने पर नष्ट करना पड़ता है, जबकि एफरेसिस मशीन में पहले ही रक्त की जांच कर ली जाती है। डेंगू, कैंसर थेरेपी व गर्भवती के लिए एफरेसिस मशीन का प्लेटलेट्स कारगर है। मशीन से माह में दो बार व साल में 20 बार प्लेटलेट्स दान किया जा सकता है, जबकि सामान्य तरीके में तीन माह में एक बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं। मशीन से केवल जरूरी कंपोनेंट को लेकर शेष रक्त को डोनर के शरीर में वापस कर दिया जाता है। होल ब्लड डोनेट नहीं करना होता है।