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Basti News: 153 पुलिसकर्मियों के 58 लाख रुपये का नहीं मिल रहा हिसाब

Tue, 27 Dec 2022 03:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी बस्ती।
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up police demo - फोटो : फाइल फोटो
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बस्ती जिले में तैनात पुलिस कर्मियों के वेतन बचत पंजिका में 2.52 करोड़ रुपये का ब्योरा नहीं मिलने की जांच सोमवार को एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने शुरू की। हालांकि जांच शुरू होने से पहले आंकिक शाखा की टीम ने काफी हद तक अभिलेखों को दुरुस्त कर लिया। मगर अभी भी करीब 153 पुलिस कर्मियों के वेतन बचत का करीब 58 लाख रुपये का लेखाजोखा नहीं मिल सका है।

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बता दें कि डीआईजी आरके भारद्वाज के वार्षिक निरीक्षण के दौरान 1087 पुलिसकर्मियों के 2 करोड़ 52 लाख रुपये के वेतन बचत के भुगतान का रिकॉर्ड नहीं मिल सका था। ऐसे में डीआईजी ने एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी को जांच का आदेश दिया था। इसके लिए सात दिन की समय सीमा तय की गई है। जांच में 2015 से लेकर 2022 तक हिसाब खंगाला जा रहा है।

इस अवधि में कितने पुलिसकर्मियों की सेविंग बुक में धनराशि दर्ज हुई थी, उसका मिलान कराया जा रहा है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आखिर किस कारण या चूक की वजह से इसका ब्योरा दर्ज नहीं किया गया। एएसपी के मुताबिक जांच शुरू कर दी गई है। समय सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जाएगी।
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यह है प्रक्रिया : पुलिस विभाग में जिस पुलिस कर्मचारी का किन्हीं परिस्थितियों में वेतन रोक दिया जाता है, उसे वेतन बचत रजिस्टर में अंकित किया जाता है। हालांकि यह रकम ट्रेजरी में ही पड़ी रहती है, मगर इसका लेखाजोखा एसपी कार्यालय के आंकिक शाखा में रखा जाता है। रुके वेतन के बारे में संबंधित पुलिस कर्मी की अधिकारियों से पैरवी अथवा सफाई पेश करने के बाद जब पुन: वेतन भुगतान का आदेश होता है, तब इस रकम का बिल बनाकर ट्रेजरी में प्रस्तुत किया जाता है और इसका संबंधित कर्मचारी के खाते में भुगतान होता है।

सिद्धार्थनगर में भी मिली गड़बड़ी
बस्ती पुलिस कार्यालय की तरह सिद्धार्थनगर जिले की आंकिक शाखा में भी बचत वेतन की रकम का लेखा जोखा नहीं पाया गया था। ऐसे में सोमवार को डीआईजी ने सोमवार को रेंज कार्यालय में सिद्धार्थनगर पुलिस कार्यालय के आंकिक शाखा के कर्मचारियों को तलब किया था। उन कर्मचारियों ने पंजिका अद्यतन न होने की दलील दी और इसके लिए मोहलत मांगी। मगर डीआईजी ने उन्हें रेंज कार्यालय में बैठकर ही अपने अभिलेख अपडेट करने की हिदायत दी।

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