बस्ती। डीएम प्रियंका निरंजन के कक्ष में सोमवार को माहौल तब कुछ देर के लिए अस्थिर हो गया, जब उनके सामने फरियादी के रूप में एक साधू बाबा पहुंचे। उन्होंने डीएम के बगल बैठे एक अफसर पर पत्थर नसब कराने के लिए 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का खुला आरोप लगाया। फिर क्या डीएम सहित उपस्थित हर किसी की निगाह साधू बाबा की ओर टिक गई। तुरंत वह साहब भी कुर्सी छोड़कर खड़े हो गए, जिनके ऊपर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया जा रहा था।
वह डीएम से सफाई पेश करने लगे। बहरहाल मौके की नजाकत को समझ डीएम ने साधू बाबा के प्रार्थनापत्र को ले लिया और जांच अधिकारी बदलने का आश्वासन देकर मामला शांत किया। हुआ यह कि कलक्ट्रेट स्थित अपने कक्ष में कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ डीएम जनसुनवाई कर रही थी। इसी बीच साधू भेष में वृद्ध हर्रैया तहसील के ढेवरहिया गांव निवासी व्याकरण शुक्ल झोला लेकर पहुंच गए। उन्होंने डीएम की ओर प्रार्थना पत्र बढ़ाते हुए अपनी फरियाद सुनानी शुरू की।
तभी डीएम को प्रकरण याद आ गया। संयोगवश इस मामले में नामित जांच अधिकारी हर्रैया तहसील के एक अफसर उनके बगल में ही बैठे थे। उनसे सवाल-जवाब किया। संबंधित अफसर ने अवगत कराया कि वह मौके पर गए थे, लेकिन शिकायतकर्ता व्याकरण शुक्ल मौजूद नहीं मिले। बात आगे बढ़ी तो साधू भेष में पहुंचे वृद्ध फरियादी ने संबंधित जांच अधिकारी पर पत्थर नसब कराने के लिए पचास हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप मढ़ दिया। इसके बाद वह साहब भी कुर्सी छोड़ खड़े हो गए। डीएम से सफाई पेश करने लगे। कुछ देर के बाद डीएम ने मामला शांत किया।
क्या है प्रकरण
व्याकरण शुक्ल ने डीएम को दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि उनकी भूमिधरी जमीन का पत्थर नसब कराने के लिए एसडीएम हर्रैया के न्यायालय में धारा 24 के तहत वाद दाखिल हुआ था। 28 अगस्त 2019 में पत्थर नसब का आदेश हुआ था। बकौल व्याकरण इसके लिए कानूनगो ने उनसे 25 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। सुकराना के रूप में वह पांच हजार रुपये मुहैया भी कराए। इसके बावजूद पत्थर नसब नहीं हुआ। वह आदेश लिए चार साल से सरकारी कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने मामला जनपद भ्रमण पर आए डिप्टी सीएम के संज्ञान में लाया। इसके बाद डीएम ने एक जांच अधिकारी नामित कर प्रकरण निस्तारित करने का निर्देश दिया। मगर न तो पत्थर नसब की कार्रवाई हुई और न ही चकमार्ग से अवैध कब्जा हटवाया गया। व्याकरण ने लिखित और मौखिक दोनों तरह से संबंधित जांच अधिकारी पर 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया।
एसडीएम हर्रैया को सौंपी गई जांच
सुनवाई के दौरान डीएम ने व्याकरण के प्रार्थना पत्र पर एसडीएम हर्रैया गुलाब चंद्र को प्रकरण की फिर से जांच सौंपी है। उन्होंने फरियादी को संतुष्ट करने के लिए उनके सामने ही एसडीएम हर्रैया को आदेशयुक्त प्रार्थना पत्र को वाट्सएप भी किया। कहा कि प्रकरण का निस्तारण शीघ्र करा दिया जाएगा। रिश्वत मांगने का आरोप निराधार है।