- सरकारी विभागों में 202 कंडम वाहनों की सवारी कर रहे अफसर
- उम्र पूरी कर चुके वाहनों पर प्रतिबंध लगाने पर विभागीय अधिकारी मौन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। तय उम्र पूरी कर चुके वाहनों की संख्या में इजाफा हो रहा है। धुआं फेंकते हुए हिलते-डुलते चल रहे ये वाहन किसी भी सड़क पर दिख जाएंगे। इनसे दूरी बनाए रखना ही सावधानी है। कार, जीप, बाइक जैसे निजी उपयोग के वाहनों के अलावा बूढ़ी हो चुकीं कामर्शियल गाड़ियों की फेहरिस्त भी लंबी हो चुकी है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में छोटे- बड़े 71 हजार से अधिक वाहन तय उम्र पूरी कर चुके हैं। हालात यह है कि सरकारी अधिकारी भी ऐसे 202 वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं।
विभागीय मानक के अनुसार, 15 साल की अवधि पूरी होने के बाद भी छोटे-बड़े वाहन निष्प्रयोज्य नहीं घोषित किए जा रहे हैं। पर, स्वामियों का मोह इन वाहनों से कम नहीं हो रहा है। निजी हो या कामर्शियल उपयोग के इन गाड़ियों को सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ाया जा रहा है। इससे रास्ते में हादसों का खतरा बना रहता है। विभाग ऐसे वाहनों पर प्रतिबंध लगाने में हिचक रहा है।
सवारियों को ढोने से लेकर माल ढुलाई तक इन कंडम वाहनों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में बूढ़ी हो चुके वाहनों से ढुलाई का काम किया जा रहा है। कभी-कभी बीच रास्ते में ही यह वाहन खड़े हो जाते हैं। फिर जाम की समस्या खड़ी होती है। पुरानी बस्ती, हंडिया चौराहा, पांडेय बाजार, रेलवे मालगोदाम, प्लास्टिक कांपलेक्स, पीएसएफ गोदाम घरसोहिया के आसपास माल ढुलाई वाले अधिकतर वाहन कंडम ही देखे जा रहे हैं। इनके संचलन को लेकर परिवहन विभाग भी मौन साधे हुए हैं।
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बूढ़े हो चुके हैं पांच हजार कामर्शियल वाहन
परिवहन विभाग के रिकाॅर्ड में पांच हजार कामर्शियल वाहन निर्धारित 15 साल की अवधि पूरी कर चुके हैं। इसमें सवारी ढोने वाले ऑटो, जीप, स्कूली वैन, बस एवं माल ढुलाई वाले ट्रैक्टर-ट्राॅली, मिनी ट्रक, पिकअप और भारी वाहन में छह चक्का तथा दस चक्का ट्रक शामिल हैं। इन वाहनों को कंडम नहीं घोषित किया गया है। इनका उपयोग किया जा रहा है। अधिकतर वाहन में खामियां दिखने भी लगी है।
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निजी वाहनों की संख्या 66 हजार पार
निजी उपयोग के 66 हजार निजी वाहन भी अपनी अवधि पूरी कर कंडम होने के कगार पर हैं। जुगाड़ से इन्हें भी सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। राह चलते समय यह हांफते रहते हैं। कुछ वाहनों के कल पुरजों के अलावा बाडी भी जवाब दे गई है। फिर भी उन्हें चलाया जा रहा है। इसमें मोटरसाइकिल, स्कूटी, जीप, कार आदि छोटे चार पहिया वाहन शामिल है। इनके संचलन पर कोई रोक नहीं है।
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202 कबाड़ वाहनों से चल रहे अफसर
कबाड़ घोषित करने वाले वाहनों की संख्या निजी व कामर्शियल ही नहीं है, बल्कि ऐसे 202 वाहनों से सरकारी अधिकारी भी फर्राटा भर रहे हैं। इन वाहनों को कंडम घोषित करने के लिए चिह्नित कर लिया गया है, लेकिन पांच साल में इन्हें बदला नहीं जा सका। भूमि सरंक्षण विभाग, कृषि विभाग, जिला उद्योग केंद्र, पुलिस विभाग समेत एक दर्जन सरकारी विभागों के अफसर खुद कंडम गाड़ियों से पर्यवेक्षण कार्यों का जिम्मा निभा रहे हैं।
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सवा चार लाख वाहनों का है पंजीकरण
जिले में कुल सवा चार लाख वाहनों का पंजीकरण है। इसमें 25 हजार वाहन कामर्शियल है। बाकी चार लाख वाहन निजी उपयोग के बताए जा रहे हैं। इसमें कार, बाइक आदि सेगमेंट की गाड़ियां शामिल हैं।
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15 वर्ष की अवधि पूरी करने पर गाड़ियों की लाइफ एक तरह से खत्म हो जाती है। बड़े शहरों में इस अवधि के बाद गाड़ियों के संचलन पर रोक है। इनसे प्रदूषण, दुर्घटना सभी को बढ़ावा मिलता है। छोटे जगहों पर इसके बाद केवल पांच साल तक के लिए पुर्नपंजीकरण का प्रावधान है। मगर यह गाड़ी जब मेनटेन हालत हो तभी होना चाहिए। यहां निष्प्रयोज्य गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने की परंपरा नहीं है।
विजय गुप्ता, मैकैनिकल एक्सपर्ट।
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वर्जन
15 साल या उससे अधिक की अवधि पूरी कर चुके वाहनों को चिह्नित कर लिया गया है। इन्हें कंडम घोषित करने के लिए वाहन स्वामियों को नोटिस भेजा गया है। सरकारी कार्यालयों, निगमों और निकायों से भी पत्राचार किया गया है। बिना री-रजिस्ट्रेशन के चल रहे पुराने वाहनों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
-पंकज सिंह, एआरटीओ, प्रवर्तन