मनमाना किराया वसूलकर पहुंचा रहे गंतव्य, यात्री परेशान
रात के समय बढ़ा रहे किराए का दर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अपना साधन नहीं है तो शहर में इधर से उधर पहुंचने के लिए महंगा किराया अदा करना पड़ रहा है। यहां ऑटो, ई-रिक्शा के किराए का कोई निर्धारण नहीं है। मुंहमांगी रकम पर सवारी ढोए जा रहे हैं। शहरी क्षेत्र का थोड़ा विस्तार क्या हो गया लोकल किराए का कोई हिसाब-किताब ही नहीं रह गया है। परंपरागत रूट गांधीनगर, मालवीय मार्ग को छोड़ दें तो अधिकतर रूटों पर पांच से छह किमी तक का किराया 50 से 100 रुपये प्रति व्यक्ति वसूला जा रहा है। बाहर से आने वाले लोगों से और ज्यादा किराया लिया जा रहा है।
शहर में ऑटो, ई-रिक्शा की भरमार है। परिवहन विभाग में दो हजार ई-रिक्शा और चार हजार से अधिक ऑटो पंजीकृत हैं। इनकी सर्वाधिक मौजूदगी शहरी क्षेत्र में है। रेलवे स्टेशन से कचहरी तक आठ किमी की दूरी में यह वाहन सवारियों को ढोते हैं। विस्तार क्षेत्र में जाने के लिए यह जल्द तैयार नहीं होते हैं। नगर पालिका एवं परिवहन विभाग की ओर से ऑटो, ई-रिक्शा के लिए रूट का निर्धारण नहीं हुआ है। यही वजह है कि मनमाने किराए पर शहर के विस्तार क्षेत्र में सवारियां ढोई जा रही हैं।
यात्रियों का आरोप है कि शहर से ओपेक चिकित्सालय कैली, पटेल चौक, बड़ेवन, मूड़घाट, मनौरी आदि स्थानों पर जाने के लिए 100 से 200 रुपये तक वसूल कर लिए जा रहे हैं। इस बात पर यात्रियों और चालकों के बीच अक्सर झड़प हो जा रही है। कुछ ऑटो एवं ई-रिक्शा की हैंडिल अव्यस्कों के हाथ में भी है। यह अक्सर वाहन चलाते समय दो की संख्या में चलते हैं।
शहर से तीन किमी दूर ओपेक चिकित्सालय कैली एवं आठ किमी दूर सोनूपार चौराहे तक की यात्रा भी काफी महंगी है। अस्पताल चौराहा एवं कंपनीबाग चौराहे पर इस रूट के लिए ऑटो खड़े मिलते हैं। मगर, इनकी प्राथमिकता बनकटी और महुली तक की सवारी के लिए होती है। लोकल यात्रियों को तरजीह नहीं दी जाती है। उनसे कैली और सोनूपार पहुंचाने के लिए बनकटी तक का किराया 40 से 50 रुपये वसूला जा रहा है।
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मनौरी से पांडेय बाजार तक 100 रुपये किराया
शहरी क्षेत्र का विस्तार मनौरी चौराहा तक हो रहा है। इस क्षेत्र में यात्रियों की चहल-पहल बढ़ गई है। यहां से पांडेय बाजार की दूरी बमुश्किल ढाई किमी है। मगर, ऑटो, ई-रिक्शा वाले मनौरी से पांडेय बाजार जाने के लिए तैयार नहीं होते हैं। काफी मान-मनौव्वल के बाद तैयार भी हो रहे हैं तो किराया उनके हिसाब से देना पड़ता है। इतनी कम दूरी तक पहुंचाने के लिए 100 से 150 रुपये तक लिए जा रहे हैं। यहां से कचहरी तक प्रति व्यक्ति 50 रुपये वसूल किए जा रहे हैं।
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हर्दिया से रोडवेज का भी मुंहमांगा किराया
हर्दिया एवं पटेल चौराहा पर बाहर से आने वाली निजी बस सेवा का स्टॉपेज हैं। ऐसे में यहां उतरने वाले यात्रियों से रोडवेज एवं शहर के अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए महंगा किराया वसूला जा रहा है। चार से पांच किमी दूरी का 200 से 300 रुपये ले लिए जा रहे हैं। ऑटो एवं ई-रिक्शा चालकों की मानें तो नियमित सवारी न होने की वजह से इन रूटों पर बुकिंग में ही चलना पड़ता है।
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300 रुपये में पहुंचे तीन किमी
पत्नी, भाई और बच्चों को दिल्ली जाने के लिए सुबह वैशाली ट्रेन पकड़ाना था। मनौरी चौराहे पर एक ऑटो वाले से पहुंचाने के लिए कहा। पहले उसने मना कर दिया। बाद में किराया 300 रुपये बताया। जबकि यहां से स्टेशन तक दूरी तीन किमी है। पूछने पर ऑटो चालक ने बताया कि और सवारी मिलेगी नहीं, इसलिए बुकिंग में चलेंगे। मजबूरी में मुंहमांगे किराए पर बुक करना पड़ा।
संतराम, मधुकरपुर
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लगेज देखते ही बढ़ा देते हैं किराया
मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों से कमाई कर लौटने वाले यात्रियों को देखते ही ऑटो एवं ई-रिक्शा चालक भांप लेते हैं। प्लेटफार्म से लेकर स्टेशन परिसर तक उनके आगे-पीछे घूमने लगते हैं। ऑटो चालक आपस में लगेज की छीनाझपटी करने लगते हैं। जैसे ही बाहर से आने वाले यात्री ऑटो में बैठते हैं वहां से तुरंत आगे बढ़ा लिया जाता है। कुछ दूर जाकर ऑटो चालक मनमाना किराए का डिमांड करते हैं।
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कोट
ऑटो के लिए आधा दर्जन रूट निर्धारित हैं। जहां तक किराया निर्धारण की बात है तो इसके लिए भी पहल की जाएगी।
पंकज सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन