बस्ती। आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत मंडल में 19 हजार कैमरे लगवाए गए हैं। इन कैमरों की वजह से कई घटनाओं का चुटकी बजाते ही वर्कआउट हो चुका है। मगर, हाल में हो रही चोरियों में चोरों की चहलकदमी अब तक किसी कैमरे में कैद नहीं हो पाई। चालाक चोरों ने कैमरों की नजर से बचते हुए ताबड़तोड़ घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस उन्हें नहीं पकड़ पा रही है। माना जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में कैमरों के न लगे होने की वजह से चोरों को पकड़ने में दिक्कत का सामाना करना पड़ रहा है।
एडीजी जोन गोरखपुर अखिल कुमार की पहल पर परिक्षेत्र में ऑपरेशन त्रिनेत्र शुरू किया गया है। इसके तहत आम लोगों के सहयोग से प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे हैं। न केवल शहर बल्कि ग्रामीण क्षेत्र तक पहुंच बनाने की कोशिश शुरू की गई। इसका नतीजा रहा कि रेंज के तीनों जनपदों में मिलाकर करीब 19 हजार कैमरे लगाए जा चुके हैं। बस्ती जिले में ही करीब आठ हजार कैमरे लगाए गए हैं। संतकबीरनगर में साढ़े चार हजार और सिद्धार्थनगर जिले में साढ़े छह हजार कैमरे लगाए जा चुके हैं। मगर, इनमें ज्यादातर कैमरे शहरी या कस्बों में लगवाए गए।
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इन घटनाओं का कैमरों से हुआ खुलासा
शहर में कोतवाली क्षेत्र के रौता चौराहे के पास निवासी अधिवक्ता सुरेंद्र मोहन वर्मा के घर में दिन दहाड़े लूट की घटना में सीसीटीवी की मदद से पुलिस ने चार दिन के भीतर खुलासा कर लिया था। इसके अलावा हाईवे पर ट्रक चोरी की घटना भी सीसीटीवी की मदद से खुली। कप्तानगंज में एटीएम काटकर चोरी की सनसनीखेज घटना के अलावा कई हत्या, दुकानों में चोरी की घटना का सीसीटीवी के जरिये खुलासा हुआ था। गौरतलब है कि यह सभी घटनाएं शहर व प्रमुख कस्बों की हैं।
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परवान नहीं चढ़ सकी योजना
गांवों व कस्बों में अपराध नियंत्रण और अवांछनीय गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाने की पहल की गई थी। तय हुआ था कि पंचायती राज विभाग से समन्वय स्थापित करके ज्यादा से ज्यादा ग्राम पंचायतों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं। जिले में 200 से ज्यादा ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जो आबादी और आमदरफ्त के लिहाज से कस्बों से कम नहीं हैं। कई कस्बे शहर के मोहल्लों से ज्यादा आबाद हैं। बाकी गतिविधियों के अलावा आपराधिक व अवांछनीय गतिविधियां भी वहां चलती रहती हैं। बावजूद इसके वहां अभी सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता न के बराबर है। ऐसे में कोई घटना होने पर पुलिस असहाय हो जाती है।
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ग्रामीण क्षेत्र में आ रही बाधा
- सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए कोई मद तय नहीं।
- ग्राम निधि के धन से कैमरे लगवाने में ग्राम पंचायतों की आनाकानी।
- कैमरों का रखरखाव व नियंत्रण करने का जिम्मा देने की चुनौती।
- गांव में स्थल चयन करने में आ रही सबसे बड़ी बाधा।
- कई ग्रामीण नहीं चाहते कि उनकी सभी गतिविधियों की हो निगरानी।
- संबंधित थाने की टीम इसे लेकर उदासीन नजर आती है।