दारुल उलूम अलमिया मदरसे का वार्षिक दीक्षांत समारोह
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सांऊघाट की ग्राम पंचायत जमदाशाही में बृहस्पतिवार की देर रात जलसे का आयोजन हुआ। इस दौरान दारूल उलूम अलिमिया मदरसा के 172 छात्रों को वार्षिक दीक्षांत समारोह में हिफ्ज, आलमियत, फजीलत एवं किरत की डिग्री दी गई। मुख्य अतिथि प्रोफेसर मौलाना फरोगुल कादिरी तथा विशिष्ट अतिथि मौलाना इरफान अलीमी व मौलाना मुख्तारूल हसन रहे।
मौलाना इरफान अलीमी ने कहा कि दारूल उलूम अलिमिया दीनी तालीम के साथ देश-विदेश में अपना नाम रोशन कर रहा हैं। प्रदेश के दो-चार मदरसों के बाद दारूल उलूम अलिमिया जमदाशाही का नाम आता है। कहा कि इल्म दुनिया की वो ताकत हैं जिससे सभी को जीता जा सकता हैं। बगैर इल्म के किसी भी कौम की तरक्की नहीं हो सकती हैं।
मौलाना मुख्तारूल हसन चिर्रा ने कहा कि फकी, मुफ्ती, दीन का आलिम वही बनता है जिस पर अल्लाह का फजल कर्म होता हैं। मौलाना फरोगुल कादिरी ने कहा कि जमीन पर कब्जा करना आसान है पर दिलों पर नहीं।
जलसा-ए-दस्तार बंदी में फजीलत के 41, आलमियत के 57, हिफ्ज के 26 तथा करात के 48 छात्रों सहित कुल 172 का दस्तारबंदी किया गया हैं। इस मौके पर प्रधानाचार्य मौलाना मोहम्मद अहमद रजा बगदादी, धर्मगुरू मौलाना मोहम्मद अयूब खान कादिरी, मौलाना मुफ्ती निजामुददीन अलीमी, प्रबंधक मोहम्मद मुशाहिद रजा आदि मौजूद रहे।