इमरजेंसी में पांच, आईसीयू में तीन वेंटिलेटर हो रहे संचालित
अधिकतर हुए कबाड़, कमरे में बंद कर रखे गए मशीन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मेडिकल कॉलेज में करोड़ाें रुपये की लागत से कोरोना काल में 158 वेंटिलेटर लगे थे। यह सभी अब खराब होकर कबाड़ बन गए हैं। सिर्फ 29 वेंटिलेटर चालू हालत में है। शेष मेडिकल कॉलेज से संबद्ध कैली अस्पताल के कमरे में बंद हैं। इनका उपयोग न होने के कारण यह कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं।
कोरोना काल के दौरान मेडिकल कॉलेज से संबद्ध कैली अस्पताल को लेबल- 2 का अस्पताल घोषित किया गया था। शासन ने यहां अलग से कोरोना मरीजों के लिए अत्याधुनिक वार्ड व संसाधनों को उपलब्ध कराया था। 159 वेंटिलेटर लगाए थे। कोरोना काल के बाद इन वेंटिलेटरों को हटाकर कमरे में बंद कर दिया गया।
बीच में एक बार जब फिर से कोरोना की दस्तक हुई थी तो कुछ वेंटिलेटर संचालित किए जाने लगे। अब सब कुछ सामान्य है तो वेंटिलेटरों की उपयोगिता भी कम हो गई। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इन मशीनों का संचालन न होने के कारण कबाड़ हो गई हैं, मगर अधिकारी इसे कंपनी के वारंटी में होने की बात बता रहे हैं।
कैली अस्पताल में सीएमएस डॉ. एसएन प्रसाद ने कहा कि वेंटिलेटर की जितनी जरूरत है, उतने स्थापित कराकर संचालित किए जा रहे हैं। सभी मशीनों में तकनीकी दिक्कत आ गई है। इसके लिए कंपनी को लिखा गया है। सभी मशीनें वारंटी में हैं। इनकी देखरेख कंपनी करेगी।
...
स्थापित वेंटिलेटर
इमरजेंसी में- पांच
एनआईसीयू में - तीन
ओटी में- एक
आई ओटी में - 10
क्रिटकल केयर यूनिट में- 10