बस्ती/सल्टौआ। टूरिस्ट वीजा के सहारे रोजी-रोटी के तलाश में पश्चिमी अफ्रीका के नाइजीरिया शहर गए बस्ती, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर जिलों के 150 मजदूरों को बंधक बना रखा है। कंपनी ने उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया इससे वे वतन वापसी नहीं कर पा रहे हैं। इसकी जानकारी होने पर परिजन परेशान हैं। मजदूरों के परिजनों ने ऑनलाइन कर प्रधानमंत्री, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास से उनकी वतन वापसी की गुहार लगाई है।
वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के खरहरा जप्ती गांव निवासी विनोद कुमार, राकेश कुमार, पन्नालाल, मो. कलीम, अब्दुल करीम, मो. गफ्फार, मो. खुशियाल, मो. यासीन, सफी अहमद व सोनहा थाना क्षेत्र के पचमोहनी गांव निवासी सद्दाम ऑयल रिफाइनरी कंपनी में वेल्डर व टेक्नीशियन का काम करते हैं। लोगों ने बताया कि ये लोग केमीटेक कंपनी बड़ौदा के माध्यम से 8 दिसंबर 2021 को पश्चिमी अफ्रीका के नाइजीरिया शहर में डागोंट आयल रिफाइनरी लिक्की फ्रीजोन लागोस में काम करने गए थे। 17 माह तक कंपनी में काम किया, मगर जब हम लोग अपना वेतन मांगने लगे तो कंपनी ने हाथ खड़ा कर दिया। काम लेना भी बंद कर दिया और रिफाइनरी में बंधक बना दिया। किसी भी श्रमिक को बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। इससे वे लोग काफी परेशान है, परिजनों ने ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से विदेश मंत्रालय से सभी की वतन वापसी की गुहार लगाई है। परिवार के लोगों ने बताया कि रोजी रोटी के लिए सब गए थे।
लौटे राम निवास ने बताई आपबीती
- एक माह पूर्व नाइजीरिया से घर आये रामनिवास ने बताया मैं भी वहां फंस गया था। बहुत कोशिश पर सिर्फ एक समय ही भोजन पानी मिल पा रहा था। अचानक मेरी तबियत खराब हो गई थी। डॉक्टर ने बताया पेट में गम्भीर बीमारी है। इस लिए कंपनी ने मुझे सिर्फ सौ डॉलर देकर तत्काल भेज दिया। लेकिन पूरा वेतन नहीं दिया। घर परिवार में पहुंचकर बहुत राहत महसूस कर तो रहा हुं। लेकिन गांव के साथ में गए लोग वहां फंसे पड़े हैं।
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ये लोग भी नाइजीरिया में बंधक हैं
- कुशीनगर के विजय पासवान, इंद्रकुमार राय, पवन कुमार पटेल, कामेश्वर गुप्ता, ओम प्रकाश, कृष्णा, कालीलाल, ओमप्रकाश, मुनीर आलम, उमेश कुशवाहा, नूर आलम, जैनुदीन, सरवन फंसे हैं। सिद्धार्थनगर के कमल किशोर, मुकेश, संजय प्रसाद, अब्दुल समद फंसे हैं। संतकबीरनगर के बालगोविंद, गोरखपुर के मैनुदीन, सुरेश कुशवाहा, ताहिर अफजल, अरविंद कुमार, बसंत प्रसाद फंसे हैं। इनके अलावा सिवान (बिहार), बलिया, गाजीपुर छपरा के भी मजदूर बंधक हैं।