बरेली। जिस तरह राजनीतिक दल हर बूथ पर 20 यूथ की तैनाती की रणनीति बनाते हैं, लोकतंत्र के पर्व में उसी तरह हमें स्वत: जिम्मेदारी निभानी होगी। पड़ोस के दो-दो घरों की जिम्मेदारी लेकर युवा कम से कम 20 लोगों को बूथ तक पहुंचाकर मतदान कराएं। इससे लोकतंत्र मजबूत होगा। देश तरक्की के रास्ते पर अग्रसर होगा। अमर उजाला कार्यालय परिसर में शनिवार को आयोजित संवाद में युवाओं ने ये बातें कहीं।
युवाओं ने कहा कि नेता का चयन जाति और धर्म के आधार पर नहीं किया जाए। ऐसे नेता को चुने जो आम आदमी के लिए आसानी से उपलब्ध रहे। लोगों की समस्याओं को सुने और संसद में उसे उठाने का भी दम रखता हो। भारत युवाओं का देश है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। लोकतंंत्र के महापर्व में सभी उत्साह के साथ प्रतिभाग करेंगे। इस दिन अवकाश होता है। ऐसे में सुबह मतदान करने के बाद दिनभर दूसरों को बूथों तक पहुंचाएंगे।
युवा मतदाताओं ने कहा कि एक बार गलत नेता का चुनाव हो जाता है तो उसे पांच साल तक झेलना पड़ता है। इसके बाद ही भूल सुधार का अवसर मिलता है। इसलिए सोच-समझकर मतदान करें। मतदाता जाति, धर्म व संप्रदाय के नेता से प्रभावित हुए बिना मतदान करें। ऐसे नेता का चुनाव करें जो क्षेत्र का चहुंमुखी विकास करे। अगर आपके अनुसार कोई भी प्रत्याशी इसमें सक्षम नहीं है तो नोटा का इस्तेमाल करें। मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए मतदान जरूर करें।
युवा मतदाताओं ने कहा कि वे विकास, रोजगार और शिक्षा को ध्यान में रखते हुए मतदान करेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सबसे अधिक परेशानी नई शिक्षा नीति से हो रही है। इसमें सुधार की पहल होनी चाहिए। जो स्वरोजगार को बढ़ावा देगा, हम उसे ही चुनेंगे।
कार्यक्रम में शोधार्थी गजेंद्र कुर्मी, दीपक सागर, छात्र संदीप सागर, लकी शर्मा, शारिक हसन खान, शारिक अब्बासी, विधि छात्र विकास महर्षि, आदित्य प्रताप सिंह, अतुल राठौर, सचिन गंगवार, विवेक पटेल, सुधांशु कुमार, शोएब अली, एनएसएस स्वयंसेवक अनमोल शंखधार उपस्थित रहे।