एक पीड़िता ने 14 दिसंबर 2010 को बारादरी थाने में रिपोर्ट लिखाई थी कि रुहेलखंड यूनिवर्सिटी में काम करने वाले मनोज पांडेय का उसके घर आना जाना था। मनोज ने डरा धमकाकर उसके अश्लील फोटो बना लिए। इन्हें वायरल न करने के एवज में पांच लाख रुपये मांगे। न देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। उसने पांच लाख रुपये देने में असमर्थता जताई तो आरोपी ने फोटो वायरल कर दिए। इस मामले में अभियोजन की ओर से कुल 10 गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता उमंग रावत ने पक्ष रखा। कोर्ट ने अभियुक्त मनोज पांडेय को सुबूतों के अभाव में बरी करने का आदेश दिया।