1450 करोड़ न मिलने से अफसरों ने अधूरा छोड़ दिया काम
बरेली। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बरेली और बदायूं में सिंचाई के लिए बदायूं सिंचाई परियोजना तैयार की थी, लेकिन इसमें अब तक केवल रामगंगा बैराज ही बन सका है। इस परियोजना के अवशेष बजट के लिए वित्त समिति ने तो स्वीकृति दे दी है लेकिन मंत्रिमंडल से मंजूरी न मिलने से यह प्रोजेक्ट लटका हुआ है। सिंचाई के समस्या से जूूझ रहे बरेली और बदायूं के हजारों किसानों को राहत देने के लिए करीब 2100 करोड़ की बदायूं सिंचाई परियोजना को मंजूरी मिली थी, इसे वर्ष 2015 में पूरा किया जाना था। शुरूआत में शासन ने 630 करोड़ रुपये दिए। इस धनराशि से 311 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हुआ। रामगंगा पर बैराज बनाने के साथ ही उसके दोनों साइड में 12.12 किलोमीटर लंबाई में पानी रोकने के लिए एफलक्स बने, लेकिन इसके बाद बजट के अभाव में आगे के काम रुक गए। परियोजना को पूरा करने के लिए बरेली और बदायूं में 469 किलोमीटर नहर और रजबहा बनाने के लिए करीब 1450 करोड़ रुपये की जरूरत है। इस रकम से 1250 किसानों से 718 हेक्टेयर भूमि खरीदी जानी है। बाढ़ खंड ने रिवाइज एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा था, लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी। सिंचाई मंत्री रहे धर्मपाल सिंह के गृह जनपद के लिए खासतौर से तैयार हुई इस परियोजना के दोबारा शुरू होने की उम्मीद इस साल इसलिए दिखाई देने लगी थी, क्योंकि बजट के लिए शासन की वित्त समिति ने स्वीकृत दे दी है। अब मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलना बाकी है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की कमजोर पैरवी की वजह से यह परियोजना अधर में लटकी है।