बरेली। होटल, दुकान, अस्पताल और अन्य स्थानों पर कार्यरत लोग जाने-अनजाने मानसिक तनाव में रहते हैं। उन्हें हर वक्त नौकरी सुरक्षित न होने की आशंका रहती है। मनोचिकित्सक के मुताबिक कामगारों के कार्यों को सराहकर उन्हें तनाव से काफी राहत मिल सकती है।
जिला अस्पताल मनोचिकित्सक डॉ. आशीष के मुताबिक आतिथ्य-सत्कार ज्यादातर मामलों में पर्यटन क्षेत्र (होटल, रेस्त्रां) से संबंधित है। इसके अलावा मॉल में वेंडिंग, टारगेट ओरिएंटेड, जनसंपर्क संबंधित गैर सरकारी कार्य व अस्पताल के कर्मचारियों का काम भी सीधे उपभोक्ता सेवा से जुड़ा होता है। इसमें सामने वालों की समस्या और उचित मांग को पूरा करने की शर्त निहित होती है। इनमें किन्हीं वजहों से दुर्व्यवहार की शिकायत पर नौकरी से हाथ धोने की नौबत किसी भी वक्त बनी रहती है। इसीलिए नौकरी की सुरक्षा न होने से वे अक्सर तनावग्रस्त होते हैं, जो जॉब बर्न सिंड्रोम की वजह बनता है। बताया कि इस सिंड्रोम के शिकार लोगों का उपेक्षित व्यवहार, सराहनीय काम को भी तवज्जो न मिलने, कार्य का समय बढ़ने पर उस अनुपात में वेतन न बढ़ने व अन्य वजहों से व्यवहार आक्रामक होता जाता है। आगे चलकर वे हल्की सी बात पर मारपीट, गाली-गलौज करने लगते हैं।
पहचान छिपाकर पूछते हैं निजात का तरीका
बताया कि मनकक्ष के हेल्पलाइन नंबर पर हर दिन चार से पांच कॉल ऐसी पहुंचती हैं, जिसमें नौकरीपेशा लोग व्यवहार में आ रहे परिवर्तन का जिक्र करते हैं। उसमें से ज्यादातर की बातों में निराशा और नकारात्मकता होती है। बताया कि वे लोग पहचान खुलने के डर से ओपीडी में आने से बचते हैं। कई कहां और किन परिस्थतियों में हैं, यह भी साझा नहीं करते।
इस तरह तनाव से दूर रह सकते हैं
- बेहतर कार्य करें, प्रदर्शन में कमी न रखें।
- प्रोजेक्ट या कार्य का प्रस्तुतिकरण अच्छा हो।
- सहयोगी से अच्छे संबंध बनाएं। मनमुटाव न हो।
- कार्यालय के मुखिया से बचें नहीं, संपर्क में रहें।
- विवाद में शांत रहें। वरिष्ठ से परामर्श जरूर लें।
- कार्यालय के कार्य और बातें घर तक न ले जाएं।