बरेली। रक्षाबंधन पर इस बार 29 से 31 अगस्त के बीच रोडवेज के सामने पांच लाख यात्रियों का दबाव झेलने की चुनौती होगी। रीजनल वर्कशॉप में इसकी तैयारियां चल रही हैं। बसों को दुरुस्त किया जा रहा है। वहीं, बस अड्डों पर यात्री सुविधाओं को लेकर कोई पहल नहीं की गई है। शहर के सेटेलाइट व पुराना बस अड्डे पर अतिक्रमण का बोलबाला है। यात्रियों के लिए पेयजल का भी समुचित प्रबंध नहीं है।
29 से 31 अगस्त के बीच शहर के दोनों बस अड्डों पर रोज 50 से 60 हजार यात्रियों का आवागमन होगा। सामान्य दिनों में ही यहां रोज 30 से 35 हजार यात्री आते-जाते हैं। यात्रियों की संख्या दोगुनी होने के अनुमान के बीच भी बस अड्डों के आसपास से न तो अतिक्रमण हटवाया गया है, न ही यात्रियों के बैठने और पीने के पानी की सुविधा पर ध्यान दिया गया है। ऐसे में रक्षाबंधन पर लोगों को यात्री सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ेगा।
पुराना और सेटेलाइट बस अड्डे पर प्रदेश के 20 में से 13 रीजन की बसें आती हैं। इसके अलावा यहां उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान की बसें भी आती हैं। रोज औसतन 350 बसों का आवागमन होता है।
रुहेलखंड डिपो में बेपटरी व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए पिछले सप्ताह मुख्यालय ने एआरएम योगेंद्र कुमार की जगह मऊ डिपो के एआरएम अरुण वाजपेयी को भेजा था। एक सप्ताह बाद भी नए एआरएम ने चार्ज नहीं लिया है। वहीं, पहले से तैनात एआरएम योगेंद्र कुमार मेडिकल अवकाश पर चले गए हैं। डिपो का चार्ज अवर अभियंता निर्माण आरके सिंह को दिया गया है। ऐसे में रक्षाबंधन पर रुहेलखंड डिपो की बसों का संचालन लड़खड़ा सकता है।
बसों की मरम्मत को लेकर कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी। आवश्यकतानुसार 29 अगस्त को ही पर्याप्त बसें ऑन रोड होंगी। रीजनल के साथ डिपो के वर्कशॉपों में भी कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे हैं। - धनजी राम, सेवा प्रबंधक
रोडवेज के रीजनल वर्कशॉप में इन दिनों जहरीले सांपों का बसेरा है। दरअसल, वर्कशॉप में 150 से ज्यादा खटारा बसें नीलामी के लिए खड़ी हैं। इन बसों से सामान निकाल कर जरूरत के मुताबिक दूसरी बसों में लगाया जा रहा है। इन कबाड़ बसों से सांप निकल रहे हैं। सफाई नहीं होने से वर्कशॉप में झाड़ियां उग आई हैं। सांपों के खतरे को देखते हुए सेवा प्रबंधन धनजी राम ने यहां सफाई शुरू कराई है। इस बीच शनिवार और रविवार को वर्कशॉप में कई जहरीले सांप निकले।