फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बरेली में जन्मी दुर्लभ बच्ची: शरीर पूरी तरफ सफेद, निकल आए थे दांत; 30 लाख में एक होता है हार्लेक्विन बेबी

Fri, 16 Jun 2023 07:00 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

नवजात का शरीर पूरी तरह सफेद था। त्वचा जगह-जगह से फटी हुई थी। होंठ का विकास पूरी तरह नहीं हुआ था। मुंह में ऊपर के कई दांत भी निकल आए थे। डॉक्टर के मुताबिक, ऐसे जन्मे बच्चों को हार्लेक्विन इक्थियोसिस बेबी कहा जाता है। 
विज्ञापन
गर्भ में ही हो गई थी हार्लेक्विन बेबी की मौत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बरेली में दुर्लभ आनुवांशिक त्वचा विकार (हार्लेक्विन इक्थियोसिस) से पीड़ित बच्ची का राजेंद्र नगर स्थित निजी अस्पताल बृहस्पतिवार को जन्म हुआ। उसकी गर्भ में ही मृत्यु हो चुकी थी। बीमारी की वजह पता करने के लिए डॉक्टरों ने स्किन बायोप्सी और केरिया टाइमिन जांच के लिए सैंपल लिया है।

विज्ञापन


परिजनों ने बताया कि शरीर पूरी तरह सफेद था। त्वचा जगह-जगह से फटी हुई थी। आंख की पलकें पलटी थीं। होंठ का विकास पूरी तरह नहीं हुआ था। मुंह में ऊपर के कई दांत भी निकल आए थे। डॉक्टर के मुताबिक, ऐसे जन्मे बच्चों को हार्लेक्विन इक्थियोसिस बेबी कहा जाता है। 

ये भी पढ़ें- भाई की घिनौनी करतूत: फुफेरी बहन के जरिये दोस्त को फंसाया, कमरे में बुलाकर उतरवाए कपड़े, बनाया अश्लील वीडियो
विज्ञापन


गर्भ में बच्ची के सात माह ही पूरे हुए थे। इस बीमारी में बच्चे के शरीर में तेल बनाने वाली ग्रंथियां न होने से त्वचा फटने लगती है। आंखों की पलकें पलटने की वजह से चेहरा भयानक लगता है। दुर्लभ विकार के साथ मृत पैदा हुई बच्ची अस्पताल के स्टाफ के बीच चर्चा का विषय बनी रही। विकार की वजह जानने के लिए डॉक्टरों ने बच्ची के शरीर से सैंपल लिए हैं।

30 लाख में एक होता है हार्लेक्विन बेबी

वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक, अब तक हुए शोध के अनुसार करीब 30 लाख जन्मे बच्चों में से एक हार्लेक्विन इक्थियोसिस की चपेट में रहता है। पूरी दुनिया में ऐसे अब तक करीब ढाई सौ मामले ही सामने आए हैं। 

ये भी पढ़ें- 'बधाई हो आप मां बनने वाली हैं': नर्स के यह कहते ही भड़क गई महिला, बोली- मैंने तो कॉपर टी लगवाई थी; हंगामा

अक्सर जन्म के दौरान या कुछ घंटों बाद ही बच्चे की मौत हो जाती है। जो बच जाते हैं उनके भी ज्यादा दिन तक जीवित रहने की संभावना कम होती है, क्योंकि इसका कोई कारगर इलाज नहीं है। यह विकार माता-पिता से नवजात को ऑटोसोमल रिसेसिव पैटर्न से मिलता है, जो जीन के उत्परिवर्तन से होता है। 
विज्ञापन

शरीर में प्रोटीन और म्यूकस मेंबरेन की गैर-मौजूदगी की वजह से बच्चे की ऐसी हालत हो जाती है। ऐसे में जन्म लेने वाले बच्चे की त्वचा एकदम सख्त और मोटी हो जाती है। इसके साथ ही त्वचा का रंग सफेद हो जाता है।

डॉक्टरों का दावा, पहले भी आ चुका है केस

हार्लेक्विन बेबी के जन्म के मामले में डॉक्टरों का कहना है कि बरेली में वर्षों पहले इस तरह के बच्चे का जन्म हो चुका है। हालांकि, उसकी जान बची या नहीं इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।

बच्ची देख टूटा परिवार, डॉक्टर ने समझाया

बताते हैं कि फतेहगंज पश्चिमी के रहने वाले दंपति को जब बच्ची के मृत पैदा होने की जानकारी मिली तो उन्होंने उसे देखना चाहा। बच्ची को देख पूरा परिवार टूट सा गया। डॉक्टर ने उन्हें दुर्लभ बीमारी से ग्रसित होने की जानकारी दी। वजह बताई तो वे शांत हुए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें