खुर्रम गौटिया में बियावानी कोठी के पास नगर निगम और सेना के बीच सुरक्षा दीवार निर्माण को लेकर चल रहा विवाद सुलझ गया है। सेना के अफसर सड़क किनारे सुरक्षा दीवार निर्माण को लेकर अपने रुख में नरमी दिखाते हुए दो से पांच मीटर तक जमीन छोड़ने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि शर्त रखी गई है कि जो भी जमीन छोड़ेंगे, वह सेना की ही रहेगी और और नगर निगम की यह जिम्मेदारी होगी कि वह इस जमीन पर किसी भी तरह से अतिक्रमण नहीं होने देगा। मंगलवार को सेना और नगर निगम के अफसर मौके पर जाकर जमीन की नापजोख करेंगे। इसके बाद समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। खुर्रम गौटिया से कैंट मोड़ आर्मी एरिया तक सेना ने फेंसिंग कर रखी है। हाल ही में सेना के अधिकारियों ने यहां सुरक्षा दीवार बनाने की बात कही थी लेकिन इसका विरोध किया गया था। सोमवार को महापौर डॉ. आईएस तोमर की अध्यक्षता में उनके कक्ष में खुर्रम गौंटिया में सेना की सुरक्षा दीवार निर्माण को लेकर हुई बैठक में जाट रेजीमेंट सेंटर के स्टेशन कमांडिंग ऑफिसर ब्रिगेडियर एनके झा, एडम कमांडेंट कर्नल अमितवीर पांड्या और सेना के इंजीनियर सैंफिल ने हिस्सा लिया। नगर निगम की ओर से नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव, अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह, चीफ इंजीनियर सूरजपाल सिंह, एक्सईएन गयूर अहमद, मानचित्रकार समशुल हसन और पार्षद राजेश अग्रवाल ने दीवार निर्माण होने के बाद आने वाली समस्याएं सेना के अफसरों के समक्ष रखीं। मेयर और नगर आयुक्त ने कहा कि सड़क किनारे दीवार बनने की स्थिति में बिजली, पानी, सीवर और टेलीफोन की लाइनों में आए दिन फाल्ट होंगे। फाल्ट को ठीक करने के लिए सेना के अफसरों से बार-बार संपर्क करना पड़ेगा। इससे जनता और सेना दोनों के लिए समस्याएं बढ़ेंगी। कमांडिंग ऑफीसर ब्रिगेडियर एनके झा और एडम कमांडेंट कर्नल अमितवीर पांड्या ने कहा कि वह जनता की परेशानी रोकने के लिए सड़क के किनारे दो से पांच मीटर अंदर तक दीवार बना लेंगे लेकिन शर्त ये है कि जो भी जमीन छोड़ी जाएगी, वह हमेशा सेना की रहेगी। नगर निगम ने ये शर्त मान ली। अब मंगलवार को पूर्वाह्न 11 बजे नगर निगम और सेना के अफसरों की मौजूद जमीन की नापजोख होगी।