बरेली। नावेल्टी चौराहा स्थित रेस्टोरेंट में नोडल अधिकारी के निर्देश के बावजूद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अफसर खेल करने से नहीं चूके। उच्चाधिकारी के निर्देश के बावजूद लीगल के बजाय सर्विलांस सैंपलिंग कर खानापूर्ति कर दी। अब सिटी मजिस्ट्रेट ने रिकॉर्ड तलब किए हैं।
खुशबू एन्क्लेव निवासी तनवीर उल इस्लाम ने सिटी मजिस्ट्रेट को 18 जनवरी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि रेस्टोरेंट से चार प्लेट पूड़ी-सब्जी पैक कराई थी। घर जाकर देखा तो पूड़ी के बीच में छिपकली चिपकी थी। बतौर नोडल अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के जिला अभिहित अधिकारी को प्रकरण की जांच और सैंपलिंग के निर्देश दिए थे। शुक्रवार को टीम रेस्टोरेंट पहुंची और सर्विलांस सैंपलिंग कर पीठ थपथपा ली।
शनिवार को इस पर सवाल उठे। पता चला कि सिटी मजिस्ट्रेट ने जिला अभिहित अधिकारी को कार्यालय बुलाकर पूछताछ की। लीगल सैंपलिंग क्यों नहीं हुई, इस सवाल पर वह सैंपलिंग की नियमावली समझाने लगे।
लीगल पर 50 फीसदी सैंपल जांच में फेल होना अनिवार्य
जिला अभिहित अधिकारी अपूर्व श्रीवास्तव का तर्क था कि शिकायत मिलने पर सर्विलांस सैंपलिंग की जाती है। क्योंकि अगर लीगल सैंपलिंग की गई और जांच में सैंपल पास हो गया तो सीएम डैश बोर्ड पोर्टल पर रैंकिंग गिरती है। बताया कि नियमावली के तहत लीगल सैंपलिंग करने पर 50 फीसदी सैंपल फेल होना अनिवार्य है।
सिटी मजिस्ट्रेट के सवालों का जवाब नहीं दे सके अधिकारी
जिला अभिहित अधिकारी के जवाब से सिटी मजिस्ट्रेट असंतुष्ट रहीं। कहा कि जब शिकायत आई और निर्देश दिए थे तब लीगल सैंपलिंग क्यों नहीं की। सैंपल के पास और फेल होने की संभावना 50 फीसदी है तो पहले कैसे तय किया कि सैंपल जांच में पास ही होगा। लीगल और सर्विलांस सैंपलिंग में क्या किया जाए, इस पर उनकी राय क्यों नहीं ली गई। अगर सर्विलांस सैंपल किया गया तो इसकी सूचना क्यों नहीं दी।
वर्जन
एफएसडी की टीम ने सर्विलांस सैंपलिंग की है, इसकी मुझे जानकारी नहीं थी। प्रकरण संज्ञान में आने पर पूछताछ की गई। उनसे सैंपलिंग की नियमावली और अब तक हुई लीगल और सर्विलांस सैंपलिंग की रिपोर्ट मांगी है। - रेनू सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
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नियमानुसार सैंपल लेकर जांच के लिए उसे लखनऊ प्रयोगशाला भेजा है। रिपोर्ट फेल मिलने पर लीगल सैंपलिंग होगी। नियमानुसार लीगल सैंपल भरने पर उनमें से 50 फीसदी जांच में फेल होना अनिवार्य है। - अपूर्व श्रीवास्तव, जिला अभिहित अधिकारी
राहुल। फाइल फोटो
राहुल। फाइल फोटो