मशहूर शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी
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बस क्या बताऊं.. मौत को बहुत करीब से देखकर लौट आया। ऊपर वाले का लाख करम है, वरना घटना के वक्त का मंजर ऐसा था कि क्या कहूं...। यही कहूंगा कि चाहने वालों की दुआएं काम आ गईं। ये अल्फाज हैं पूर्व एमएलसी व प्रसिद्ध शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी के। हादसे में घायल होने व दिल्ली में इलाज के बाद प्रो. वसीम अब बरेली लौट आए हैं। अब भी उनके हाथ पर प्लास्टर बंधा है और डॉक्टरों ने आराम करने की सलाह दी है। पिछले दिनों दिल्ली से लौटते समय हापुड़ में सड़क हादसे में वह घायल हो गए थे।
पहले मेरठ के अस्पताल पहुंचे, वहां दिल्ली
प्रो. वसीम बरेलवी ने बताया कि हादसे के समय शायर अकील नोमानी भी उनके साथ थे। जानने वालों ने उन्हें एंबुलेंस से हापुड़ पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद वहां से मेरठ के आईजी प्रवीण कुमार को सूचना दी तो उन्होंने एसएसपी रोहित सिंह सजवाण को फोन किया। आनन-फानन व्यवस्था हुई। वहां से मेरठ एक अस्पताल में पहुंचे।
ऑपरेशन की बारी आई तो उन्होंने बरेली के डॉ. ब्रजेश्वर सिंह को याद किया। उन्होंने दिल्ली के एक अस्पताल जाने की सलाह दी और खुद भी वहां पहुंच गए। प्रो. वसीम बरेलवी ने बताया कि ऑपरेशन के बाद अब बेहतर महसूस कर रहा हूं।
पत्नी तक को नहीं दी थी सूचना
प्रो. वसीम ने कहा कि पहले वह किसी को परेशान नहीं करना चाहते थे। पत्नी तक को सूचित नहीं किया। ऑपरेशन की बारी आई तो बताया, फिर काफी लोगों को पता चल गया। देश-विदेश से लोग फोन कर खैरियत पूछते रहे। सभी की दुआओं का मैं दिल से शुक्रगुजार हूं। बताया कि उनके करीबी दोस्त जैन साहब उन्हें दिल्ली से घर तक छोड़ने आए। मैं उनका भी बेहद एहसानमंद हूं।