बरेली के पूरनपुर ब्लॉक में मनरेगा में घपलेबाजी का अनोखा मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत में चार मनरेगा मजदूरों की मौत के बाद भी उनसे मजदूरी करा ली गई। मृत मजदूरों के खाते में भुगतान भी कर दिया गया। मामला विकास विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब कार्रवाई से बचने के लिए धनराशि की रिकवरी के प्रयास शुरू किये जा रहे हैं। खंड विकास अधिकारी ने इस मामले में जांच कराकर कार्रवाई करने की बात कही है।
मनरेगा में आए दिन कोई न कोई गड़बड़ी सामने आती रहती है। प्रधान तो कभी कर्मचारियों और उनके करीबियों की ओर से अपनी फर्में बनाकर उनमें भुगतान कर घपलेबाजी के मामले पूर्व में प्रकाश में आ चुके हैं। घपलेबाजी सामने आने पर कुछ कर्मचारियों को पूर्व में जेल भी जाना पड़ा था। उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। इन सबके बाद भी मनरेगा में घपलेबाजी नहीं रुक रही है। मनरेगा में मजदूरी कराने के लिए प्रॉवधान की बात करें तो मजदूर से काम कराने से पहले उससे आवेदन लिया जाता है।
जिस पर रोजगार सेवक द्वारा स्वीकृत दी जाती है। मजदूरी के दौरान उसकी हाजिरी लगती है। कार्यदिवस अंकित किए जाते हैं। इन सबके बावजूद ग्राम पंचायत धर्मापुर में चार ऐसे मजूदरों से मजदूरी करा ली गई जिनकी मौत कोरोना काल या इससे पहले हो चुकी है। इस गड़बड़ झाले को कई दिन से छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। मामला चर्चा में आने पर अफसर भुगतान को वपस कराने का तर्क दे रहे हैं।
इससे पहले भी पकड़े जा चुके हैं कई घपले
पूरनपुर। मनरेगा में घपलेबाजी के मामले इससे पहले भी पकड़े जा चुके हैं। एक ग्राम पंचायत में बगैर स्वीकृति के पुलिया बनने का मामला पकड़ा गया था। जिसे बाद में श्रमदान घोषित कर दिया गया। शेरपुरकलां में हाल ही में एक सड़क को दो साल में दो बार बनाने का मामला सामने आया। शिकायत पर खंड विकास अधिकारी ने स्वयं पहुंचकर जांच की थी। इससे पहले तकनीकि सहायक की घपलेबाजी पर सेवा समाप्त की गई जा चुकी थी। डीएम के आदेश पर धोखाधड़ी की तीन एफआईआर दर्ज कराई गई थीं।
मामला संज्ञान में आया है। मर चुके मनरेगा मजदूरों के जॉब कार्ड परिवार के साथ संयुक्त रूप से बने होंगे। मरने के बाद उनके नाम नहीं कटवाए गए होंगे। गलत ढंग से हुए भुगतान की रिकवरी कराकर लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
-सर्वेश कुमार सिंह, खंड विकास अधिकारी