बरेली के आंवला निवासी पेंटर तौहीद खान का एनआईए की टीम से आज सामना होगा। सबूत सही साबित हुए तो मुश्किल बढ़ेगी। तौहीद के यूट्यूब चैनल पर इस्रायल और हिजाब के भी वीडियो मिले हैं।
बरेली के आंवला निवासी पेंटर तौहीद खान का बुधवार को लखनऊ में एनआईए से आमना-सामना होगा। वहां उसके खिलाफ कोई पुख्ता साक्ष्य मिला या आरोप साबित हुआ तो मुश्किल होगी। वरना वह आसानी से छूट जाएगा। उसके यूट्यूब चैनल पर प्रसारित वीडियो फिलहाल चर्चा का केंद्र बने हैं।
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आंवला के पक्का कटरा निवासी तौहीद के यूट्यूब चैनल पर कई वीडियो आपसी सद्भावना वाले हैं। इनमें जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव करने को गलत बताया गया है। उसके सोशल मीडिया एकाउंट पर कोई देश विरोधी पोस्ट भी नहीं दिख रही है। माना जा रहा है कि तौहीद के व्हाट्सएप और फोन नंबर से ही कोई संदिग्ध गतिविधि हो रही थी, जिसके चलते एनआईए ने उसके घर छापा मारा।
चर्चा है कि एनआईए की पूछताछ में किसी स्लीपर मॉड्यूल ने तौहीद का नाम लिया हो, जिस वजह से यह कार्रवाई की गई हो। वहीं तौहीद के यूट्यूब चैनल पर इस्रायल को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया गया है। इसमें इस्रायल के झंडे को कौए फाड़ रहे हैं। साथ ही हिजाब को लेकर भी उसके चैनल पर वीडियो डाला गया है।
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मां के साथ तौहीद लखनऊ रवाना
छापे के दौरान तौहीद की मां की तबीयत खराब हो गई थी। अब तौहीद को लखनऊ में बुधवार को एनआईए की टीम के सामने हाजिर होना है। तौहीद के भाई ने बताया कि वह मंगलवार दोपहर ही लखनऊ चला गया है। चूंकि बीमार मां की देखभाल वही करता है तो मां भी उसके साथ गई हैं।
गजवा-ए-हिंद के मॉड्यूल बना रहे कट्टरपंथी
कश्मीर और पाकिस्तान में बैठे कट्टरपंथी देश के तमाम हिस्सों में गजवा-ए-हिंद के स्लीपिंग मॉड्यूल बना रहे है। उनके दिमाग में कट्टरता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है। कश्मीर और पाकिस्तान में बैठे कट्टरपंथी व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम और यूट्यूब चैनल, फेसबुक पेज के जरिये युवाओं के मन में जहर घोल रहे हैं।
इससे पहले बरेली के कटघर इलाके में पकड़ा गया इनामुल भी कट्टरपंथियों के संपर्क में था। उसकी निशानदेही पर एटीएस ने कई अन्य मॉड्यूल भी पकड़े थे। अब इनपुट मिलने के बाद एनआईए ने बिहार, यूपी और गुजरात में छापा मारा है।
ऐसे बनाए जाते हैं स्लीपिंग मॉड्यूल
पाकिस्तानी कट्टरपंथी गजवा-ए-हिंद से जोड़ने के लिए कम उम्र के युवाओं को चुनते हैं, जो सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर जहर उगलते पोस्ट करते हैं। कट्टरपंथी उनकी पोस्ट और सोशल मीडिया एकाउंट पर नजर रखते हैं। सोशल मीडिया पर ही दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं।
पहले साधारण बातें कर नंबर लेने की कोशिश करते हैं। नंबर लेने के बाद वह पहले अपने देश के हालातों के बारे में चर्चा करते हैं। फिर जरूरी जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। जो युवा उनकी बातों में फंस जाते हैं, उनको वह अपने सोशल मीडिया ग्रुप से जोड़ लेते हैं।
दिमाग में भरते हैं कट्टरवाद का जहर
सोशल मीडिया पर खास ग्रुपों के जरिये कट्टरता और गजवा-ए-हिंद का जहर उनके दिमाग में भर दिया जाता है। इन ग्रुपों में मुस्लिमों के प्रति क्रूरता से संबंधित वीडियो दिखाए जाते हैं। कट्टरपंथी फोन पर संपर्क कम ही करते हैं, क्योंकि ऐसा करके वह देश की सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ जाते हैं। इसलिए इंटरनेट कॉलिंग और सोशल मीडिया कट्टपंथियों का मुख्य हथियार बन चुके हैं। इंटरनेट के जरिये कट्टरपंथी देश के युवाओं तक आसानी से संपर्क बना रहे हैं।