बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. केपी सिंह और कुलसचिव अजय कृष्ण यादव के बीच छिड़ी वर्चस्व की जंग में संस्थान की छवि प्रभावित हो रही है। नियमों और अधिकारों का हवाला देकर कुलपति और कुलसचिव इसे रोकने के मूड में नहीं हैं। कुलपति जहां कुलसचिव के कार्य को नियमों के विपरीत बता रहे हैं, वहीं कुलसचिव का दावा है कि वह हर कागजात को सत्यापन के बाद ही पास करते हैं।
कुलपति प्रो. केपी सिंह ने बताया कि लंबे समय से कुलसचिव की विभिन्न मामलों में शिकायतें आ रहीं थीं। सुधार के लिए उन्हें कई बार पत्र भी भेजे गए, लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ा। कार्यों के प्रति उनकी उदासीनता से विभिन्न गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। शिक्षकों को भी परेशानी हो रही थी। अंत में उन्हें पद से विरक्त किया गया। सात दिनों में जवाब देने के लिए कहा गया है। छात्रहित ही एक मात्र उद्देश्य है। इस क्रम में लगातार प्रयास भी किए जा रहे हैं।
कुलसचिव ने बताया कि सत्यापन करने के बाद ही फाइलों का निस्तारण किया जा रहा था। इसमें जो फाइलें ठीक थीं, उनका ससमय निस्तारण भी किया गया। उनकी जवाबदेही शासन स्तर पर है। वह नियमानुसार कार्य करते रहेंगे। इसमें समस्याएं आती हैं तो उनका भी सामना किया जाएगा। अब तक जिन कार्यों में दिक्कतें आई हैं, उनसे संबंधित व्यक्तियों को उसका कारण भी बताया गया है। शासन स्तर पर भी पूरे प्रकरण की जानकारी दी गई है।
शिक्षक संघ ने बनाई दूरी
कुलपति और कुलसचिव के बीच चल रही उठा पटक से शिक्षक संघ (रूटा) ने किनारा कर लिया है। जबकि, पूरे प्रकरण के मूल में शिक्षकों का फिक्सेशन ही अहम बिंदु रहा है। कुछ शिक्षकों की समस्या होने से संगठन इस टकराव में शामिल होना नहीं चाहता है। शिक्षकों का आरोप है कि प्रोन्नति की लंबित प्रक्रिया को कुलसचिव शुरू नहीं कर रहे हैं। साथ ही जिनकी प्रोन्नति हो चुकी है, नौ माह बाद भी उनका वेतन निर्धारण नहीं किया जा सका।
पुलिस मुठभेड़ में घायल बदमाश।स्रोत-पुलिस