बरेली। प्रख्यात दीनी विद्वान एवं धर्म गुरु आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का तीन रोजा उर्स-ए-रजवी पूरी शानो शौकत के साथ शुक्रवार को कुल के साथ मुकम्मल हो गया। इसमें शिरकत करने के लिए आला हजरत के दीवानों का सैलाब उमड़ पड़ा।
उर्स स्थल इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान पर जलसे को संबोधित करते हुए मुफ्ती गुलफाम रामपुरी और मौलाना जहिद रजा ने सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी का पैगाम जायरीन तक पहुंचाया। कहा, मुसलमान अपने बच्चों का खास ख्याल रखें। उन्हें दुनियावी तालीम के साथ-साथ दीनी तालीम भी दिलाएं। बच्चे जवान हो जाएं तो वक्त पर शादी कर दें ताकि वे भटक न सकें। इससे कानून व्यवस्था में भी खलल पड़ता है। शादियों में फिजूल खर्च और दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर नबीरे आला हजरत मौलाना तौसीफ रजा खां उर्फ तौसीफ मियां ने आला हजरत की शान में तकरीर की। उन्होंने कहा कि आला हजरत ने मजहबो मिल्लत के लिए जो अजीम खिदमत अंजाम दी, उसकी आज पूरी दुनिया कायल है। फतवा आलमगीरी को उस वक्त के 500 उलमा ने मिलकर दो जिल्दों में तैयार किया था, जबकि इमाम अहमद रजा खां ने तन्हा फतवा रजविया 12 जिल्दों में लिख दी, इससे दुनिया भर में आज भी शरई मसले हल किए जा रहे हैं। नबीरे आला हजरत मुफ्ती अरसलान रजा खां ने कहा कि इश्को मोहब्बत, इल्मो तहकीक का नाम रजवियत है। नबी-ए-करीम की पैरवी का नाम रजवियत है।
लंदन से आए अल्लामा अजहरुल कादरी ने अपना अखलाक और किरदार बेहतर करने और आला हजरत के पैगाम को आम करने पर जोर दिया। इस दौरान मुफ्ती सलीम नूरी, मुफ्ती अयूब, मौलान मुख्तार बहेड़वी, मौलाना नोमान अख्तर, मौलाना हाशिम रजा, मुफ्ती सैयद कफील हाशमी, मुफ्ती इमरान हनफी, मौलाना फारूख (कश्मीर), मौलाना शम्शउद्दीन हक (बंगलादेश) आदि ने खिताब किया।
जलसे की सरपरस्ती दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां उर्फ सुब्हानी मियां और सदारत सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी ने की। निगरानी सैयद आसिफ मियां और उर्स प्रभारी राशिद अली खान की रही। पूर्व में उर्स की शुरुआत साउथ अफ्रीका के कारी अलीम रजा ने कुरान की तिलावत से की। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि नातो मनकबत का नजराना सुब्हानी मियां के पौत्र सुल्तान मियां, दिलकश रांचवी, मौलाना फाइक उल जमाली आदि ने पेश किया। जलसे के आखिर में आला हजरत के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसके बाद अहसन मियां ने दुआ की।
घरों पर लगाएं परचम-ए-रिसालत
उर्स के मंच से मुफ्ती आकिल रजवी और अल्लामा सगीर जोखनपुरी ने कहा कि जिस तरह तिरंगा हमारे मुल्क की पहचान है और हम लोगों ने जश्ने आजादी के मौके पर घर-घर तिरंगा लगाया, उसी तरह पैगंबरे इस्लाम की यौमे विलादत (जन्म दिन) के मौके पर दुनिया भर में मुसलमान परचम-ए-रिसालत (रसूल का झंडा) अपने घरों पर लगाकर आशिके रसूल होने का सुबूत दें।
जुलूस-ए-मोहम्मदी में न बजाएं डीजे
उर्स के मौके पर कारी सखावत नूरी ने मुसलमानों के जुलूस में डीजे बजाने की सख्त निंदा की। उन्होंने ईद मीलादुन्नबी पर निकलने वाले जुलूस-ए-मोहम्मदी में डीजे पर सख्ती से रोक लगाने की अपील की।
उर्स की व्यवस्था में इनका रहा सहयोग
उर्स-ए-रजवी में मौलाना जाहिद रजा, शाहिद खान, हाजी जावेद, नासिर कुरैशी, अजमल नूरी, परवेज नूरी, औरंगजेब नूरी, ताहिर अल्वी, मंजूर रजा, आसिफ रजा, शान रजा, मुजाहिद रजा, खलील कादरी, सैयद फैजान, इशरत नूरी, तारिक सईद, यूनुस गद्दी, हाजी अब्बास नूरी, मोहसिन रजा आदि का सहयोग रहा।