बरेली में शारीरिक अक्षमता छिपाकर मेडिकल कराने पहुंचे दो अभ्यर्थी शक होने पर पकड़े गए। आईओसी रिक्रूटमेंट सेल को चिकित्सक ने इसकी जानकारी दी। दोनों के खिलाफ कैंट थाने में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पलिस ने आरोपी लोकेश और हुनमान को गिरफ्तार कर लिया। बाद में दोनों को थाने से ही जमानत दे दी।
मिलिट्री हॉस्पिटल में तैनात सूबेदार श्रीणु की ओर से थाना कैंट में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल में अभ्यर्थियों को चिकित्सा परीक्षण के लिए दिव्यांगता के आधार कई वर्गों में विभाजित किया गया था। मेडिकल पूरा होने से पहले किसी को भी रिक्रूटमेंट सेल से बाहर जाने की अनुमति नहीं है। सोमवार दोपहर लगभग 12 बजे नेत्रों की जांच के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल वीरेश राज को एक अभ्यर्थी पर शक हुआ तो उन्होंने पहचान चिह्नों से उसकी दिव्यांगता की जांच की।
इस अभ्यर्थी के पहचान चिह्न समीक्षा प्रमाणपत्र के अनुसार नहीं मिले तो नेत्र रोग विशेषज्ञ ने ओआईसी रिक्रूटमेंट सेल को बुलाकर बायोमेट्रिक से सत्यापन कराया। सेना पुलिस की पूछताछ में अभ्यर्थी ने मूल इंडेक्स नंबर बताया। इसके बाद बायोमेट्रिक सत्यापन किया गया तो पता चला कि दो रिक्रूट योजनाबद्ध तरीके से मेडिकल के लिए पहुंचे हैं ताकि वे अपनी-अपनी कमियां छिपा सकें। सेना पुलिस ने आरोपी हरियाणा के पलवल निवासी लोकेश और जोधपुर (राजस्थान) के पुतरपुरा निवासी हनुमान को कैंट पुलिस के हवाले कर दिया। दोनों के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की है। इंस्पेक्टर कैंट बलवीर सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों को थाने से जमानत दे दी गई है।