बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में भुगतान को लेकर कुलसचिव और वित्त अधिकारी के बीच खींचतान शुरू हो गई है। वित्त अधिकारी के प्रभार संभालने के आठ दिन बाद ही कुलसचिव ने पत्र लिखकर अपनी शक्तियों का हवाला देते हुए चेताया कि उनकी अनुमति के बिना किसी तरह का भुगतन न किया जाए। वहीं, वित्त अधिकारी का दावा है कि एक अप्रैल को कार्यभार ग्रहण करने के बाद अब तक उन्होंने एक भी भुगतान नहीं किया है।
कुलसचिव की ओर से वित्त अधिकारी को भेजा गया पत्र परिसर में चर्चा का विषय बना है। सूत्रों के अनुसार विश्वविद्यालय में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कुलसचिव को किनारे कर दिया गया था। ऐसे में कुलसचिव की ओर से जारी पत्र को नए अधिकारी पर रौब गालिब करने के रूप में भी देखा जा रहा है। कुलसचिव ने पत्र में लिखा है कि वित्त विभाग की ओर से कुछ भुगतान संबंधी व अन्य पत्रावलियों पर कार्रवाई उनकी अनुमति के बिना की जा रही है।
वर्जन
मैंने एक अप्रैल को प्रभार लिया है। कुलसचिव के संज्ञान में लाए बिना अब तक किसी तरह का भुगतान नहीं किया है। पत्र के बारे में जानकारी हुई है, लेकिन अभी देखा नहीं है। - विनोद कुमार, वित्त अधिकारी, रुविवि
वित्त विभाग को बिना अनुमति के भुगतान करने के संबंध में पत्र दिया गया है। यह रुटीन प्रक्रिया है। - अजय कृष्ण यादव, कुलसचिव, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
कुलसचिव का रुका वेतन
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में अधिकारियों की बीच खींचतान थम नहीं रही है। वित्त अधिकारी को पत्र लिखने के बाद कुलसचिव का वेतन रोका गया है।
विश्वविद्यालय में एक मार्च को प्रभार संभालने वाले वित्त अधिकारी विनोद कुमार को कुलसचिव ने अपने अधिकार बताते हुए पत्र लिखा था। इसके बाद कुलसचिव अजय कृष्ण यादव का वेतन रोक दिया गया है। कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि रजिस्ट्रार का वेतन सशर्त रुका है। वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर उनसे प्रमाणपत्र मांगे गए थे, जिसे वह उपलब्ध नहीं करा सके। दस्तावेज उपलब्ध कराने पर वेतन जारी किया जाएगा।
कुलसचिव ने बताया कि कुलपति ने उनकी व्यक्तिगत पत्रावलियां तलब की हैं। उनके दस्तावेज शासन को भेजे गए हैं। इसलिए वह वित्त अधिकारी को कागजात उपलब्ध नहीं करवा पाए थे। संवाद