बरेली। मच्छरजनित बीमारियों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम पर मरीजों को पूरा भरोसा है, लेकिन इलाज पर नहीं। हालत यह है कि सीएचसी-पीएचसी पर बने मलेरिया-डेंगू वार्ड खाली पड़े हैं, जबकि जांच कराने के लिए कतार लग रही है।
शासन से जारी संवेदनशील ब्लॉकों की सूची में बरेली के शेरगढ़, भमौरा, मझगवां, बिथरी, मीरगंज ब्लॉक शामिल हैं। अब तक जिले में मिले 2,648 मरीजों में से आधे इन्हीं ब्लॉकों में हैं। अमर उजाला ने इन इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों की पड़ताल की तो पता चला कि मरीजों को खोजने, दवा देने और फॉलोअप के लिए प्रभावित इलाकों में शिविर लग रहे हैं। आए दिन नए मरीज भी मिल रहे हैं। उन्हें दवाएं भी दी जा रही हैं, पर कुछेक मरीज शुरुआत में ही भर्ती हुए थे। अब केंद्र खाली पड़े हैं।
बताया जाता है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर स्टाफ रात में नहीं रुकते। ऐसे में भर्ती मरीज को बेहतर इलाज मिलेगा या नहीं, इसको लेकर परिजन संशय में रहते हैं। वहीं, चिकित्सक भी गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। जबकि, जांच और इलाज की सुविधाएं स्वास्थ्य केंद्रों पर भी उपलब्ध हैं।
जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती हैं पांच मरीज
हार्ट वार्ड में बनाए गए डेंगू-मलेरिया वार्ड में मंगलवार को डेंगू के दो और मलेरिया के तीन मरीज भर्ती रहे। इनमें दो मरीज शहर के हैं, जबकि तीन अन्य सीएचसी से रेफर होकर आए हैं। एमएस डॉ. एलके सक्सेना के मुताबिक सीएचसी-पीएचसी पर इलाज की सभी सुविधाएं हैं, पर वे मरीजों को रेफर कर देते हैं। बदायूं, पीलीभीत से भी रेफर होकर मरीज पहुंच रहे हैं।
मलेरिया विवैक्स मरीज में हैं हल्के लक्षण
सीएचसी के चिकित्सकों का दावा है कि मलेरिया के विवैक्स पैरासाइट की चपेट में आ रहे मरीजों में बेहद हल्के लक्षण होते हैं। उन्हें दवाएं दी जा रही हैं। घर पर रहने के दौरान उनकी निगरानी की जा रही है। जबकि, फेल्सीपेरम से पीड़ित मरीजों की हालत गंभीर होने की आशंका रहती है। अब तक पीएफ के करीब दो सौ मरीज मिले हैं। डेंगू की चपेट में 38 लोग मिले हैं। बीते वर्ष संख्या 371 थी।
स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया-डेंगू की चपेट में आने वाले मरीजों के इलाज के लिए सभी संसाधन, दवाएं उपलब्ध हैं। जिन मरीजों की हालत गंभीर होती है, उन्हें भर्ती करने के निर्देश हैं। अगर मरीज जबरन रेफर हो रहे हैं तो इसे दिखवाएंगे। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
अमर उजाला ब्यूरो