बरेली। रेलवे ने ट्रेनों का न्यूनतम किराया 30 से घटाकर 10 रुपये कर दिया है, लेकिन ट्रेनों में लगातार जनरल कोचों की संख्या कम की जा रही है। जनरल के साथ स्लीपर श्रेणी के कोच भी घटाकर उनके स्थान पर एसी श्रेणी के कोच लगाए जा रहे हैं। इससे यात्रा महंगी हो रही है। ट्रेनों में सामान्य श्रेणी के एक-दो कोच ही लगाए जा रहे हैं।
कोरोना काल के बाद ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ तो न्यूनतम किराया 10 से बढ़ाकर 30 रुपये कर दिया गया था। पिछले माह न्यूनतम किराया घटाए जाने के बाद अनारक्षित टिकटों की बिक्री में 20 फीसदी तक इजाफा हुआ है। दूसरी ओर, 22 कोच की रैक में अब सात की जगह सिर्फ दो-दो जनरल व स्लीपर कोच लगाए जा रहे हैं। 24 कोच की रैक में दो जनरल, पांच स्लीपर व 15 एसी कोच लगाए जा रहे हैं। एसी कोच अधिक होने से अमीर तबके को राहत मिल रही है, वहीं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की परेशानी बढ़ गई है।
ढीली हो रही जेबसामान्य श्रेणी में बरेली से दिल्ली का किराया 110 रुपये है। स्लीपर श्रेणी में यह 190 से 210 रुपये तक होता है। एसी-थ्री में 565, एसी-टू में 760 और एसी-प्रथम श्रेणी में किराया 1180 रुपये तक है। तत्काल श्रेणी में टिकट लेने पर यात्रियों को और भी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
पिछले रिकाॅर्ड के आधार पर लगाए जाते हैं कोच
ट्रेनों में स्लीपर या एसी श्रेणी के कोचों की संख्या बढ़ाने के लिए संबंधित ट्रेन का छह माह का रिकाॅर्ड देखा जाता है। इसी आधार पर कोच बदलने का फैसला किया जाता है। हालांकि, रेलवे अनारक्षित ट्रेनों के साथ ही समय-समय पर विशेष ट्रेनों का भी संचालन करता है।
वर्जन
ट्रेनों की विभिन्न श्रेणियों में वेटिंग के आंकड़ाें के आधार पर कोच लगाए जाते हैं। जनप्रतिनिधियों और सलाहकारों से भी सुझाव लिए जाते हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए अनारक्षित और पैसेंजर ट्रेनों का भी संचालन किया जाता है। एसी श्रेणी के कोचों में टिकट की ज्यादा मांग है। - राजेंद्र सिंह, पीआओ