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Bareilly News: आवागमन ठप... ईंधन व अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित

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बरेली। हिट एंड रन कानून में बदलाव के विरोध में नए साल के पहले दिन रोडवेज, ट्रक, टैक्सी, ई-रिक्शा, ऑटो और ट्रक चालकों की हड़ताल का शहर समेत जिले में व्यापक असर दिखा। वाहनों के पहिये नहीं घूमने से हाहाकार जैसी स्थिति रही। गंतव्य तक जाने के लिए लोग भटकते नजर आए। सेटेलाइट और पुराने बस अड्डे पर यात्री परेशान रहे। इस दौरान जंक्शन पर भीड़ बढ़ गई। वाहन चालकों ने बरेली-शाहजहांपुर हाईवे सहित जिले में कई जगह जाम भी लगाया। ईंधन व अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित रही। मंगलवार और बुधवार को भी चालक हड़ताल पर रहेंगे।
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हड़ताल के दौरान शहर में कई स्थानों पर चालकों ने सवारियां लेकर जा रहे ऑटो, ई-रिक्शा व अन्य वाहनों को जबरन रुकवाकर सवारियों को उतरवा दिया। सर्दी के बीच महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को पैदल चलना पड़ा। सेटेलाइट, पुराना बस अड्डा व जंक्शन पर कई बार विवाद की स्थिति भी बनी। सेटेलाइट बस अड्डे के पास प्रदर्शन कर रहे हड़ताली चालकों की पुलिस से नोकझोंक भी हुई।
फरीदपुर में टोल प्लाजा के पास हड़ताली चालकों ने बरेली-शाहजहांपुर हाईवे पर चार घंटे तक जाम लगाए रखा। जाम के दौरान हाईवे पर निजी वाहनों के साथ एंजुलेंस भी फंस गईं। पुलिस ने एक चालक को हिरासत में ले लिया। इस पर अन्य चालकों ने विरोध शुरू कर दिया। दबाव में पुलिस को चालक को छोड़ना पड़ा। बाद में मशक्कत कर जाम खुलवाया। नवदिया झादा चौराहा, इन्वर्टिस जीरो प्वाइंट के पास भी हाईवे पर आड़े-तिरछे वाहन खड़े कर जाम लगा दिया। बहेड़ी में ट्रक यूनियन ने जाफरी चौराहे पर जाम लगाया। आंवला में पुरैना चौराहे पर व सिरौली में अलीगंज रोड पर जाम लगाया।
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हड़ताल के कारण शहर में ऑटो, ई-रिक्शा का संचालन ठप्प रहा। इस दौरान आसपास के गांवों के लोगों ने शहर आने के लिए तांगा-बुग्गी का सहारा लिया। शहर के लोगों ने भी इसका इस्तेमाल किया। पहले दिन हड़ताल के कारण शहर में एक लाख से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है। रोडवेज बसों से इन दिनों रोजाना औसतन 25 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। इसके अलावा शहर में नौ हजार से ज्यादा ऑटो, ई-रिक्शा और टैक्सियों का संचालन होता है।
हड़ताल में रोडवेज के चालकों के भी शामिल होने की वजह से रुहेलखंड और बरेली डिपो की 380 बसें वर्कशाॅप से ही नहीं निकल सकीं। सुबह के समय कुछ बसों को रूट पर भेज दिया गया था, लेकिन उनको भी रास्ते में रोक दिया गया। इस वजह से 60 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
बरेली से विभिन्न रूटों पर संचालित ई-बसों को भी हड़ताली चालकों ने रास्ते में रोककर सवारियों को उतरवा दिया। सिटी बस सेवा के तहत इन रूटों पर 25 बसों का संचालन होता है। सोमवार को बसों का संचालन ठप्प रहने के कारण सिटी बस सेवा को भी 80 हजार रुपये का नुकसान हुआ है।
द बरेली ट्रक ओनर्स ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी शोभित सक्सेना के मुताबिक चालकों की हड़ताल की वजह से जिले में 400 से ज्यादा ट्रक खड़े रहे। लिहाजा, सुबह से ही परचून, खाद्यान्न व अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति बाधित हुई। रेता-बजरी और भवन निर्माण सामग्री की आपूर्ति भी प्रभावित रही। हड़ताल से शहर में करीब 40 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित रहा।
ट्रकों के चक्काजाम की वजह से परसाखेड़ा स्थित एलपीजी बॉटलिंग प्लांट से ट्रक रवाना नहीं हो सके। लिहाजा, भरे सिलिंडर डिस्ट्रीब्यूटर्स तक नहीं पहुंच सके। सोमवार को डीलरों ने गोदाम में रखे स्टॉक से उपभोक्ताओं को सिलिंडर मुहैया कराए। आल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन बरेली शाखा की जिलाध्यक्ष अंजू सिंह ने बताया कि अगर दो से तीन दिन और हड़ताल जारी रही तो गोदाम में रखे सिलिंडर खत्म हो जाएंगे। जिले में प्रतिदिन तीन लाख सिलिंडरों की खपत होती है। ऐसे में लोगों के घरों में खाना पकाना मुश्किल हो जाएगा।
ट्रक, बस, डंपर के चक्के थमने से डीजल की खपत भी प्रभावित रही। बरेली पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि हड़ताल से करीब 80 फीसदी खपत प्रभावित रही। कार, जनरेटर संचालक ही डीजल लेने पहुंचे थे। दूसरी ओर, आंवला स्थित इंडियन ऑयल के डिपो से लोड लेकर एक भी टैंकर नहीं निकले। पेट्रोल पंप संचालक राशु अग्रवाल ने बताया कि दिन भर कोई ट्रक, बस डीजल भरवाने नहीं पहुंचा। गनीमत रही कि 31 दिसंबर को ही पेट्रोल, डीजल के टैंकर मंगा लिए थे। अगर यही स्थिति आगे भी रही तो ईंधन आपूर्ति न होने से कार, बाइक का भी संचालन ठप्प होने की आशंका से इन्कार नहीं कर सकते।
डेलापीर मंडी में विभिन्न शहरों और दूसरे राज्यों से रोज छोटे-बड़े 100 से अधिक वाहन आते हैं। मिलन वेजिटेबल एंड फ्रूट ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष शुजाउर्रहमान ने बताया कि चालकों की हड़ताल की वजह से दिल्ली की आजादपुर मंडी से सब्जियां नहीं आ पा रही हैं। अगर यही हाल रहा तो सब्जियों के भाव बढ़ जाएंगे।
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