यह था मामला
स्टेडियम रोड स्थित एम खान अस्पताल में शुक्रवार को संजय नगर के एक हिंदू दंपती अपने दो साल के बेटे का तोतलेपन का इलाज कराने पहुंचे थे। आरोप है कि तालू के ऑपरेशन के बजाय बच्चे का खतना कर दिया गया। इस मामले में जांच कमेटी ने प्रथम दृष्टया अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हुए लाइसेंस निलंबित कर दिया है। अस्पताल में नए मरीज भर्ती करने पर रोक लगा दी गई है।
अस्पताल में आवाजाही रही बंद, लौटे मरीज
लाइसेंस निलंबित होने के बाद अस्पताल में ओपीडी, इमरजेंसी आदि चिकित्सकीय सेवाएं बंद रहीं। जो मरीज भर्ती थे, अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें फिलहाल कहीं शिफ्ट नहीं किया है। जो मरीज इलाज कराने पहुंचे थे, उन्हें कहीं और इलाज कराने की बात कहकर स्टाफ ने लौटा दिया। प्रकरण पर अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया गया पर उन्होंने कोई जानकारी देने से इन्कार कर दिया।
'ढाई साल के बच्चे का नहीं होता जीभ का ऑपरेशन'
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक तीन साल से पहले बच्चे के तोतलेपन के इलाज के लिए ऑपरेशन नहीं होता है। बच्चा हिंदी वर्णमाला के शब्दों का उच्चारण क्रमवार सीखता है। तीन साल बाद ही वह साफ बोल पाता है। अभिभावकों को जल्दबाजी नहीं करानी चाहिए।
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक के अध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल ने कहा कि तीन साल उम्र पूरी करने के बाद भी बच्चा स्पष्ट न बोल सके तो विशेषज्ञ से परामर्श कराना चाहिए। वरिष्ठ सर्जन डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने भी तीन साल उम्र पूरी होने के बाद ही ऑपरेशन की बात कही है।