शव पर कई चोटों थीं लेकिन मौत का सही कारण स्पष्ट न होने पर बिसरा सुरक्षित कर दिया गया। पुलिस ने शव उनके भाई के हवाले कर दिया। आरोपियों ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव गांव न ले जाकर रामगंगा किनारे उसका अंतिम संस्कार कर दिया। तय दिन पूरे होने से पहले दसवां संस्कार भी रामगंगा किनारे ही कर दिया। यहां भाई के साथ सीमित ही लोग रहे।
विरोधियों को फंसाने के लिए दी फर्जी तहरीर
मनोहर ने एसएसपी को बताया कि उसकी हत्या का आरोप लगाकर उसके भाई ने गांव के ही नरेंद्र, हरिओम व रामप्रसाद के खिलाफ झूठी तहरीर दे दी। ये लोग फंसे तो इन्होंने ही उसकी तलाश शुरू की और नेता झुकसा जाकर उसे खोज लिया। मनोहर ने डर जताया कि आरोपी उसकी हत्या कर उसके शव को ठिकाने लगा सकते हैं।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि मनोहर के आरोपों की जांच सीओ प्रथम को दी गई है। अगर आरोपों में सच्चाई है तो उसके साथ साजिश करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।