बरेली। एसआईटी की जांच में कामिल हसन जैदी के प्राचार्य रहने के दौरान ही छात्र-छात्राओं से फीस के नाम पर रकम वसूलकर फर्जी प्रमाणपत्र बांटे जाने की पुष्टि हो रही है। जांच को भटकाने की नीयत से ही खुसरो कॉलेज के चेयरमैन शेर अली जाफरी ने दो माह पहले कामिल हसन जैदी की जगह विश्वनाथ शर्मा को प्राचार्य का चार्ज दे दिया था। साथ ही, अपने बचाव का रास्ता तैयार करने के लिए विजय शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था।
आरोपी शुरुआत से ही जांच की दिशा को भटकाने की कोशिश करते रहे। उनकी इस कोशिश में सीबीगंज थाने के कई पुलिसकर्मी भी भागीदार रहे। अब एसआईटी की जांच में एक-एक कर राज उजागर हो रहे हैं। यह भी पता चला है कि डी फार्मा के नाम पर तीन सत्रों में छात्र-छात्राओं से वसूली की गई। उनसे मोटी रकम वसूलकर उनको फर्जी डिग्री थमा दी गई। एसआईटी जांच के दौरान कई और तथ्य भी सामने आए हैं।
छात्र-छात्राओं से वसूलकर जाफरी के बेटे को दी थी रकम : कामिल
एसआईटी की पूछताछ में पूर्व प्राचार्य कामिल हसन जैदी ने बताया कि डीफार्मा के छात्र-छात्राओं से वसूली के बाद उसने पूरी रकम शेर अली जाफरी के बेटे को दे दी थी। उसने खुद को निर्दोष बताते हुए तीनों शैक्षिक सत्र में कॉलेज में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं का विवरण व उनसे वसूली गई रकम का ब्योरा जांच टीम को उपलब्ध कराया है।
वर्जन
खुसरो कॉलेज के पूर्व प्राचार्य कामिल हसन जैदी को सीबीगंज थाने बुलाकर एसआईटी ने पूछताछ की है। उसने अपनी सफाई में कुछ दस्तावेज दिए हैं। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। जांच पूरी कर जल्द ही रिपोर्ट एसएसपी को सौंप दी जाएगी। - मानुष पारीक, एसपी साउथ