बरेली। जिले के परिषदीय विद्यालयों में एक जुलाई से पठन-पाठन का कार्य शुरू हुआ। पहले दिन बच्चों को तिलक लगाकर स्वागत किया गया। हालांकि बच्चों को अव्यवस्थाओं का भी सामना करना पड़ा। फर्नीचर के अभाव में बच्चों ने फर्श पर बैठकर पढ़ाई की तो कहीं रास्ते से स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों को खासा मशक्कत करनी पड़ी। पहली और दूसरी कक्षा की किताबें नहीं आने से बच्चों को पुरानी किताबों से पढ़ाई करनी पड़ी। अमर उजाला की ओर से की गई विद्यालयों की गई पड़ताल की रिपोर्ट...
बिना शिक्षक चल रहा विद्यालय
प्राथमिक विद्यालय रिठौरा में 158 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, लेकिन यहां एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। दो शिक्षामित्रों के भरोसे पढ़ाई कराई जा रही है। फर्नीचर के अभाव में बच्चे दरी पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। आलम यह है कि मार्च में सेवानिवृत्त हुए प्रधानाध्यापक मोहम्मद अहमद के स्थान पर कोई चार्ज लेने नहीं आया, जिस कारण वह अब भी सेवाएं दे रहे हैं। इनके पास प्राथमिक विद्यालय सनईया धनसिंह का भी प्रभार था। वहां भी एक शिक्षामित्र तैनात है। ऐसे में बच्चों को पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
स्मार्ट टीवी पर देखा पाठ्यक्रम
प्राथमिक विद्यालय सूफी टोला में विद्यार्थियों के स्वागत के लिए स्मार्ट कक्षाओं को गुब्बारे और झालरों से सजाया गया। छात्र-छात्राओं का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। मध्याह्न भोजन में बच्चों के लिए खीर बनाई गई। नवप्रवेशित बच्चों का अन्य बच्चों से परिचय कराया गया। प्रधानाध्यापक शालिनी गुप्ता ने बताया कि बच्चों को पढ़ाई से संबंधित पाठ्यक्रम स्मार्ट टीवी पर दिखाया गया।
बदहाल रास्ते से स्कूल पहुंचे बच्चे
प्राथमिक विद्यालय खुर्रम गौटिया में बदहाल रास्ते से विद्यार्थी विद्यालय पहुंचने को मजबूर है। यहां रास्ते में गोबर और गंदगी का ढेर लगा हुआ है। जगह-जगह जलभराव से बच्चों को परेशानी होती है। प्रथम दिन तिलक लगाकर किया गया। बच्चे गमले लेकर विद्यालय पहुंचे, जहां उन्हें पढ़ाई के साथ रुचिकर गतिविधियां कराई गईं। प्रधानाध्यापक शशि रानी ने बताया कि बच्चों ने पहले दिन काफी मस्ती की।