बरेली। सरकार ने खूंखार कुत्तों को पालने पर रोक लगा दी है। नगर निगम भी दावा कर रहा है कि खूंखार कुत्तों को पालने का लाइसेंस किसी को नहीं दिया जाएगा, लेकिन शहर में कितने खूंखार कुत्ते हैं? पालने वाले लोग कौन हैं? इसकी कोई जानकारी विभाग के पास नहीं है। अभी तक जो ब्योरा विभाग के पास है उसमें से खूंखार श्रेणी में रखा गया कुत्ता किसी के पास नहीं है। वहीं शहर के कई इलाकों में खूंखार कुत्तों को लोगों ने पाल रखा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर खूंखार कुत्तों को पालने पर रोक प्रभावी कैसे होगी?
स्थिति यह है कि शहर में कुत्ता पालने वालों की संख्या तो हजारों में है लेकिन नगर निगम के दस्तावेजों में महज 125 लाइसेंसधारी ही कुत्ता पाल रहे हैं। इनके पास भी लेब्राडोर, जर्मन शैफर्ड, पग, व मिश्रित नस्ल वाले कुत्ते हैं। खुद निगम के पशु चिकित्साधिकारी की तरफ से करीब छह महीने पहले कराए गए सर्वे में पता चला था कि शहर में करीब दो हजार से ज्यादा लोग कुत्ते पाल रहे हैं। इसके बावजूद लाइसेंस बनवाने के लिए कोई अभियान नहीं चला। यही नहीं लोग कौन से कुत्ते पाल रहे हैं? वे कितने खतरनाक हैं? ये जानकारी विभाग के पास सर्वे के बाद भी नहीं।
इधर, हाल ही में सरकार ने खूंखार नस्ल वाले कुत्तों की ब्रिकी, आयात व ब्रीडिंग (जन्म कराने) पर रोक लगा दी है। साथ ही कहा है कि खतरनाक श्रेणी के कुत्तों को रखने का लाइसेंस जारी न किया जाए। वहीं जिनके पास पहले से कुत्ते हैं उन्हें बधियाकरण कराना होगा। ऐसे में सवाल यह है कि जब विभाग को यही नहीं पता कि खूंखार कुत्ते किन लोगों के पास हैं? तब इन कुत्तों की ब्रीडिंग पर रोक कैसे लगाई जाएगी? अधिकारियों के पास भी इसका जवाब नहीं है।
इन पर लगाया गया प्रतिबंधरॉटविलर, मेस्टिफ्स, पिटबुल टेरियर के अलावा मिश्रित नस्ल तोसा इनू, अमेरिकन स्टाफोर्डशायर टेरियर, फिला ब्रजीलिरो, अमेरिकन बुलडॉग, कॉकेशियन शेफर्ड डॉग, वोल्फ डॉग्स, रेडीशियन रिजबैक, बोसबोएल, मध्य एशियाई शेफर्ड डॉग, टोर्नजैक, कनारियो, मॉस्को गार्ड आदि कुत्तों को खूंखार श्रेणी में मानते हुए प्रतिबंध लगाया गया है।
नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी डा. आदित्य तिवारी ने बताया कि अप्रैल 2023 से अब तक 2600 कुत्तों को पकड़वाकर उनका वैक्सीनेशन व बधियाकरण कराया जा चुका है। डा. तिवारी ने बताया कि पकड़े गए कुत्तों को वहीं छुड़वा दिया गया है, जहां से पकड़ा गया था। कुत्तों को पकड़ने के लिए एक प्राइवेट एजेंसी हायर की गई है। यह कुत्तों को पकड़ती है।
कुत्ता पालने का लाइसेंस लेने की फीस महज दस रुपये वार्षिक है। इसके बावजूद न तो लोग लाइसेंस ले रहे हैं और न निगम उन्हें जागरूक कर रहा है। निगम के पशु चिकित्साधिकारी ने छह माह पहले बोर्ड की बैठक में लाइसेंस फीस को बढ़ाकर 500 रुपये करने का प्रस्ताव रखा था लेकिन प्रस्ताव बैठक में पास नहीं हो सका।
खूंखार कुत्तों को पालने का लाइसेंस नहीं दिया जा रहा है। पूरे शहर में महज 125 लोगों के पास कुत्तों को पालने का लाइसेंस है। इनमें से किसी के पास खूंखार श्रेणी वाला कुत्ता नहीं है। - डा. आदित्य तिवारी, पशुचिकित्साधिकारी, नगर निगम