बरेली। जीआईएस सर्वे के बाद जारी गड़बड़ बिलों को दुरुस्त करने में नगर निगम की मशीनरी फेल साबित हो रही है। अधिकारियों ने दावा किया था कि अधिकतम आठ दिनों में समस्या का समाधान कर दिया जाएगा, लेकिन लोग एक-एक महीने से निगम के चक्कर लगा रहे हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। बिलों को ठीक करने के सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं।
सर्वे में गलत भवन का फोटो लगाकर गड़बड़ बिल बनाए जाने से प्रभवित उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी हो रही है। ऐसे उपभोक्ता बिल ठीक कराने के लिए नगर निगम या जोन कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। पार्षद राजेश अग्रवाल के मुताबिक, बिलों को सुधारने का काम इतना सुस्त है कि इस वित्तीय वर्ष में सभी भवन स्वामियों की समस्याओं का समाधान ही नहीं हो सकेगा। नगर निगम प्रशासन ने गृहकर में दस प्रतिशत की छूट मिलने की अवधि तीन महीने जरूर बढ़ा दी है, लेकिन तब तक बड़ी संख्या में बिल दुरुस्त न हो पाने से लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।
शिकायत पर दस दिन बाद हो रहा निरीक्षण
पार्षद राजेश अग्रवाल के अनुसार जिन भवन स्वामियों की आईडी मैच नहीं हो रही, उनकी शिकायत पर 10 दिन बाद कर्मचारी निरीक्षण के लिए पहुंच रहे हैं। इसके बाद भी एक सप्ताह तक उनकी आईडी सॉफ्टवेयर पर दिखाई नहीं देती, जिससे बिल निकाला जा सके। जिन उपभोक्ताओं की आईडी डबल होने समेत आवासीय बिल व्यावसायिक में आने और भवन के गलत फोटो आने की शिकायत है, वह उपभोक्ता भी परेशान हो रहे हैं। स्वयंकर निर्धारण प्रणाली और आपत्ति फार्म डालने के बाद भी एक माह से लोग परेशान हो रहे हैं।
नहीं हो रहा सुधार
पुराने बस अड्डे पर मंसूर अहमद की 35 वर्गफुट की दुकान को दो मंजिला दर्शाया गया है। उनके अनुसार इसको लेकर उन्होंने आपत्ति की तो 10 दिन बाद निरीक्षण हुआ। उसके बाद से करीब 20 दिन हो चुके हैं, लेकिन सही बिल अभी तक नहीं मिल सका है।
रामपुर गार्डन के विश्वजीत के अनुसार उनके मकान का बिल चार गुना बढ़कर आया तो उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई। आपत्ति के बाद 15 दिनों तक किसी ने सुध नहीं ली। भागदौड़ करने के बाद निरीक्षण कराया गया, लेकिन एक माह बाद भी बिल नहीं सुधरा।
सूफी टोला निवासी नईम बेग के मकान का बिल 80 फीसदी बढ़कर 28 हजार रुपये आया है। कई लोगों से बातचीत के बाद फार्म भरकर जोन कार्यालय में जमा कर दिया। वहां से नगर निगम पहुंचा, लेकिन अभी तक निस्तारण नहीं हुआ। इसको भी 20 दिन हो चुके हैं।
वर्जन
जनता की परेशानी को लेकर कई बार अधिकारियों को चेताया जा चुका है। स्पष्ट निर्देश हैं कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बिलों को सुधारने में हो रही देरी के संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक कर मामलों का निस्तारण कराया जाएगा। - उमेश गौतम, महापौर