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व्यापारियों में व्यापारियों के सवाल, बंदी तो ठीक है लेकिन जो कर्ज डूबते हैं उनका क्या होगा

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बरेली के श्यामगंज बाजार में लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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ज्यादातर ने कहा- बाजार बंदी समस्या का हल नहीं, सख्ती करे प्रशासन तो सुधर सकते हैं हालात

बरेली। बाजार बंदी के लिए व्यापारी संगठन अपनी-अपनी मुहिम चला रहे हैं, लेकिन आम व्यापारी अलग ही असमंजस में फंसा हुआ है। कोरोना का डर तो है तो लेकिन उसके इतर सवाल और भी जटिल हैं। ज्यादातर का कहना है कि कोरोना से बचाव के लिए बाजार तो बंद कर दें लेकिन कर्ज में डूबे व्यापारियों को बर्बादी से कौन बचाएगा। व्यापारियों का कहना है कि असल लापरवाही तो स्वास्थ्य विभाग की है जो अगर पर्याप्त संख्या में जांच कराता तो यह नौबत ही नहीं आती। जहां तक बाजार में भीड़ कम करने का सवाल है तो प्रशासन रोस्टर का पालन न करने वालों पर सख्ती करे तो भीड़ खुद ब खुद कम हो जाएगी। अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट-

बड़ा बाजार में सन्नाटा, बस.. प्रशासन नियमों का पालन करा दे.. यही बहुत

सड़कों पर सन्नाटा, इक्का-दुक्का ग्राहक तो दिखे लेकिन भीड़ नहीं दिखी। कई दुकानों पर दुकानदार भी हाथ पर हाथ धरे बैठे मिले। सूट व्यापारी मोहम्मद ताबिस का कहना है कि इस बार सहालग निकल गई और माल की बिक्री नहीं हुई है। व्यापारी कर्जे में डूबा है। एक दिन छोड़कर एक दिन दुकान खुल रही है तो इससे ग्राहकी भी पूरी तरह से टूटी हुई है। कहा कि सिर्फ चालीस फीसदी ही ग्राहक बाजार में रह गया है। माल भी महंगा मिल रहा है और लॉकडाउन के कारण ही ग्राहकों की खरीदारी की क्षमता भी कम हुई है। ऐसे में अब अगर बाजार बंद होता है तो व्यापारी बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएगा। जिला प्रशासन को नियमों पर सख्ती करनी चाहिए।

आलमगिरी गंज भी सुनसान, पहले गारंटी लें कि 15 दिन की बंदी कोरोना रोक देगी

सर्राफा मार्केट में सन्नाटा दिखा। हालांकि कुछ दुकानदार रोस्टर के खिलाफ दुकान के ताले खोलकर आसपास ही टहल रहे थे। ज्वैलर संजय रस्तोगी कहते हैं कि बाजार बंदी का फैसला व्यापारी की स्वेच्छा पर छोड़ा जाए। ऐसे बाजारों को चिन्हित किया जाए जहां भीड़ बहुत ज्यादा हो और नियम टूट रहे हों। वहां सख्ती से नियमों का पालन कराने की जरूरत है न कि यह कि फिर एक बार व्यापारियों पर लॉकडाउन जैसा फैसला थोप दिया जाए। बाजार बंदी का फैसला सही नहीं होगा। क्या इसकी गारंटी है कोरोना पंद्रह दिन में शहर से खत्म हो जाएगा। जो लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं उनकी वजह से यह समस्याएं खड़ी हुई हैं। प्रशासन ऐसे लोगों पर कार्रवाई करें।

श्यामगंज: रोस्टर से मुक्त  किराना का माल सड़ गया तो कौन करेगा भरपाई

इस बाजार में शुरू से नियम टूटते रहे हैं और रविवार को भी यही हालात दिखाई दिए। बेतहाशा भीड़ के बीच दुकानदार रोस्टर के खिलाफ दुकान खोलकर या गोदामों से ग्राहकों को माल दे रहे थे। किराने के थोक व्यापारी आलोक अग्रवाल उर्फ बंटी ने बाजार बंदी को सिरे से गलत बताया। कहा, उनका कई लाख का माल लाकडाउन में दुकान बंद रहने से सड़ गया। अब बरसात का मौसम है, ऐसे में बाजार बंद हुआ तो आटा, मैदा जैसा तमाम सामान सड़ जाएगा। इसकी भरपाई कैसे होगी। छोटे दुकानदार और नमकीन भंडार वालों का माल ऐसी गर्मी में सड़ जाएगा। बाजार बंदी के बजाय नियमों का पालन कराया जाए। कई लोग रोस्टर के खिलाफ दुकान खोले हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई हो तो भीड़ खुद बाजार से कम हो जाएगी।
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