लोगों ने खुद ही बाइक लगाकर बंद किया रास्ता।
- फोटो : लोगों ने खुद ही बाइक लगाकर बंद किया रास्ता।
लोग घरों में बंद, घुमक्कड़ लड़कों ने खुद ही सड़क पर निकलना छोड़ा
बरेली। दूसरे मोहल्लों की तरह अभी तक सुभाष नगर के लोग भी सड़कों पर घूमने से बाज नहीं आ रहे थे। रविवार को यहां के युवक में कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उसे परिवार समेत अस्पताल में आइसोलेट कर पूरे इलाके को सील कर दिया गया है। खतरे को भांपकर स्थानीय लोगों ने घर से निकलना बिल्कुल बंद कर दिया है। उन्हें डर है कि कहीं उन्हें संक्रमण न हो जाए। सोमवार को अमर उजाला टीम ने इलाके का हाल देखा तो यहां अघोषित कर्फ्यू जैसा हाल था।
गली सील, पड़ोसी घरों में बंद
कोरोना पॉजिटिव युवक के घर में ताला लगा है। गली में जाने वाले रास्तों पर सीढ़ी और आड़ी तिरछी बाइक लगाकर उसे आम जनता के लिए बंद किया गया है। पुलिस यहां से करीब तीन सौ मीटर बैठी है, फिर भी लोगों में खासा खौफ है। इस गली के लोग घरों में बंद हैं। सोमवार को बालकनी से झांक रहे तपन सोलंकी ने बताया कि लोगों में अजीब सा डर है। प्रार्थना कर रहे हैं कि युवक के परिवार या पड़ोसियों में संक्रमण न मिले।
बस्ती की गलियों में सन्नाटा, घुमक्कड़ी बंद
सुभाष नगर की राजीव कॉलोनी की गलियों में लॉकडाउन के बाद भी कभी चहलपहल कम नहीं हुई थी। दुकानें भले ही बंद थीं पर मोहल्ले के घुमक्कड़ लड़के यहां कभी राशन तो कभी दवा के बहाने बाहर निकल रहे थे, मगर कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद यहां भी लोग घरों में बंद हो गए हैं। कुछ ने निकलने की कोशिश भी की तो परिवारों ने इन्हें डांटकर गेट में ताले डाल लिए। यही वजह है जो सोमवार दोपहर भर इन गलियों में सन्नाटा पसरा रहा।
निजी संस्थाएं भी करा रहीं सैनिटाइजेशन
सुभाष नगर में दमकल, नगर निगम की टीमें सैनिटाइजेशन करा रही हैं तो निजी संस्थाएं भी यहां सफाई अभियान को सफल बनाने में जुट गई हैं। आम औरत सेवा समिति के कई स्वयंसेवक सोमवार को यहां कंधों पर केन टांगे मशीनों से सैनिटाइजेशन कर रहे थे। बताया गया कि बिना किसी मदद के प्रशासन के सहयोग को ऐसा कर रहे हैं।
बच्चे-बड़े घरों में बंद, कैरम-लूडो सहारा
कोरोना केस मिलने के बाद सुभाष नगर के सामान्य परिवारों में दहशत है। बच्चे और बड़े खुद ही बाहर नहीं निकल रहे और दूध से लेकर सब्जी तक दरवाजे से ही खरीद रहे हैं। गुरुद्वारा के पास रहने वाले शरद अपने भाई बहनों के साथ दरवाजे से बाहर झांक रहे थे। पूछा तो बताया कि सबकुछ दरवाजे तक सीमित हो गया है। न किसी के घर जाते हैं और न ही किसी को आने देते हैं। दूध और फल हाथ में पकड़ते वक्त भी सावधानी बरतते हैं।