बरेली। जिले के हजारों गरीब आशियाने के लिए तरस रहे हैं। किसी की सर्दी खुले आसमान के नीचे बीती तो किसी ने पन्नी तानकर पूस बिता दिया। दूसरी ओर अफसर प्रधानमंत्री आवास योजना का लक्ष्य ही नहीं पूरा कर पा रहे हैं। वित्तीय पर्ष में दो माह ही शेष हैं, लेकिन अब तक 2844 बेघरों को आवास निर्माण के लिए पहली किस्त तक नहीं मिल सकी है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिले को वित्तीय वर्ष 2022-23 में 7540 बेघर गरीबों को आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य दिया गया था। लक्ष्य के सापेक्ष जिले में आवास के लिए 11 हजार से ज्यादा लोगों ने आवेदन किए। जांच-पड़ताल के बाद 7517 लोगों को आवास स्वीकृत किए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आवास निर्माण के लिए तीन किस्तों में 1.20 लाख रुपये मिलते हैं। आवास निर्माण में मजदूरी पर खर्च करने के लिए भी अलग से 19 हजार रुपये दिए जाते हैं। आवास निर्माण में मनरेगा के तहत जॉब कार्ड धारकों को मजदूरी देने की भी शर्त है।
गौर करने की बात यह है कि बड़ी संख्या में गरीब बेघर आवासों के लिए भटक रहे हैं। दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी जिले में आवास आवंटन का लक्ष्य तक पूरा नहीं कर पा रहा। जिन 7517 लोगों को आवास स्वीकृत किए गए उनमें अब तक 4673 लोगों को ही 40-40 हजार की पहली किस्त जारी की जा सकी है। 2844 बेघरों का अब तक आसियाना बनाने के लिए पहली किस्त का ही इंतजार खत्म नहीं हुआ है।
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पांच साल पहले आया सूची में नाम, अब तक नहीं मिला आवास
- ब्लॉक नवाब गंज की ग्राम पंचायत मुड़िया विशन सहाय की सावित्री, सुमन और मुन्नी देवी आवासहीन गरीब हैं। इनका कहना है कि 2018 में उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्रता सूची में आया था। आवास की किस्तों के बदले रुपये मांगे गए। रुपये न देने पर उनका नाम पात्रता सूची से काट दिया गया। करीब पांच वर्ष हो चुके हैं। आवास के लिए वह अब तक भटक रही हैं। गांव मसीत बली नगर की मोरकली, रेशमवती, लीलावती के नाम पात्रता सूची में होने के बाद भी इनको अपात्र मानते हुए नाम सूची से हटा दिए गए। पूर्व प्रधान छविनाथ ने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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खुदकुशी की धमकी के बाद भी दिव्यांग को नहीं मिला आवास
- तहसील आंवला की ग्राम पंचायत रामनगर निवासी कल्लू दिव्यांग है। पात्रता सूची में होने के बाद भी कल्लू को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल रहा। महीनों से ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर लगा कर थक चूके कल्लू ने आवास योजना का लाभ न मिलने पर खुदकुशी की धमकी तक दे डाली, लेकिन इसके बाद भी उसको आवास का आवंटन नहीं हो सका है। हालांकि, कल्लू के आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है कि आखिर किन कारणों से उसे अब तक आवास नहीं मिल सका। रामनगर ब्लॉक के ही गांव रेवती निवासी महिला गुलशन भी प्रधानमंत्री आवास के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा-लगा कर थक चुकी हैं।
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वर्जन-
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत जिले में आवंटित लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति काफी अच्छी है। आवास का आवंटन कई स्तरों पर जांच के बाद किया जाता है ताकि पात्रों को ही लाभ मिले। चालू वित्तीय वर्ष में आवंटित 7517 आवासों के सापेक्ष अब तक 4673 लोगों को आवास निर्माण के लिए पहली किस्त जारी की जा चुकी है। शेष को किस्त जारी करने की प्रकिया चल रही है।
- तेजवंत सिंह, पीडी डीआरडीए