बरेली। सफाई कर्मचारियों के तबादले का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। तबादला आदेश के विरोध में सफाई कर्मियों ने हाईकोर्ट में रिट दायर की है। इसमें नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, नगर स्वास्थ्य अधिकारी व उपसभापति को पार्टी बनाया गया है। हाईकोर्ट ने इन अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
30 वार्डों को ठेके पर देने के कारण बीते माह 311 सफाई कर्मचारियों का तबादला कर दिया गया था। तभी से इसको लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि बगैर किसी नियम के तबादले किए गए हैं। विरोध में सफाई कर्मचारियों ने नगर निगम में धरना-प्रदर्शन किया था। इसके बाद भी सुनवाई न होने पर कूड़े से भरीं गाड़ियां नगर निगम में खड़ी करके हड़ताल कर दी थी। इसके बाद महापौर उमेश गौतम ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर तीन दिन के लिए तबादले स्थगित करके नियमानुसार करने को कहा था। इसके बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर सफाई कर्मचारी पत्र को लेकर नगर आयुक्त के पास गए तो उन्होंने तबादले की गेंद महापौर के पाले में डाल दी। कहा कि बोर्ड की बैठक में ही 30 वार्डों को ठेके पर देने का प्रस्ताव पास हुआ है।
विवाद हल न होते देख 29 फरवरी को उत्तर प्रदेश सफाई कर्मचारी मजदूर संघ के महानगर अध्यक्ष राजेश कुमार की तरफ से हाईकोर्ट में एक रिट दायर की गई। इसमें नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, नगर स्वास्थ्य अधिकारी व उपसभापति को पार्टी बनाया गया है। रिट में कहा गया है कि नगर निगम की नियमावली में वार्डों को ठेके पर देने का प्रावधान ही नहीं है। ऐसे में सफाई कर्मचारियों के तबादले कैसे कर दिए गए? इसके अलावा शासन ने 31 मार्च से पहले सफाई कर्मचारियों के तबादले पर रोक लगा रखी है। अगर इसके बाद भी दस प्रतिशत से अधिक तबादले करते हैं तो विभागीय मंत्री से अनुमोदन कराना होगा। बगैर अनुमोदन के ही तबादले कर दिए गए। हाईकोर्ट ने इस मामले में अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।