बरेली। जिले के तीन लाख से ज्यादा परिवार आयुष्मान योजना से जुड़े हैं। इनमें से 80 फीसदी मरीज सौ बेड से कम के अस्पतालों में ही इलाज करा रहे हैं। ऐसे में सौ बेड से कम के अस्पतालों के संबद्धीकरण पर प्रतिबंध लगाने का सरकार का निर्णय सही नहीं है। सरकार को इस पर दोबारा विचार करना चाहिए। आईएमए बरेली चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. राजीव गोयल ने शुक्रवार को ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि सरकार के इस निर्णय से जनहित प्रभावित होगा। जिस सोच के साथ योजना लागू की गई थी, वह मंशा पूरी नहीं होगी। सरकारी अस्पतालों में संसाधनों का अभाव है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 3,49्र,970 लक्ष्य के सापेक्ष 3,10,799 परिवार आयुष्मान योजना से जुड़ चुके हैं। हालांकि, अब तक 10,65,712 लाभार्थियों के कार्ड बनाए गए हैं। इसमें बीते माह बरेली प्रदेश में आठवें स्थान पर रहा पर 3,09,412 लाभार्थियों का इलाज कर जिला प्रदेश में अव्वल है। इन मरीजों का इलाज निजी अस्पतालों में ही हुआ है।
आयुष्मान योजना से संबद्ध होने की राह देख रहे सौ बेड से कम क्षमता के निजी अस्पतालों को अब सुविधा से वंचित रहना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आयुष्मान योजना के तहत बरेली में 60 सरकारी और 160 निजी अस्पताल संबद्ध हैं। सरकारी अस्पतालों में अभी तक करीब पांच हजार मरीजों का आयुष्मान कार्ड से इलाज हुआ है। कई निजी अस्पतालों पर मरीजाें के छिटपुट इलाज के बाद हजारों रुपये बिल बनाने के आरोप लगते रहे हैं। बीते दिनों मुख्यमंत्री के समक्ष जनप्रतिनिधियों ने भी यह मामला उठाया था। सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह के मुताबिक जारी दिशानिर्देश के तहत नए अस्पतालों के संबद्धीकरण का प्रस्ताव फिलहाल रोक दिया गया है।