आरोप लगाया कि थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं। इसके बाद वह एसएसपी से मिली। एसएसपी के आदेश पर 14 माह बाद रिपोर्ट दर्ज की गई। विवेचना कर पुलिस ने श्रवण और गुड्डू के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं व गवाहों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया।
'विवेचक का काम सत्य तलाशना, असत्य तथ्यों पर आरोपपत्र देना नहीं'
कोर्ट ने आदेश में तत्कालीन सीओ तेजवीर सिंह और तत्कालीन इंस्पेक्टर शीशगढ़ रविंद्र कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि असत्य तथ्यों के आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया गया है। उन्होंने अपने कर्तव्य का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया। इस कारण श्रवण और गुड्डू को जेल में रहना पड़ा। विवेचक का काम सत्य को खोजना है। एसएसपी बरेली सभी थानों को सचेत करें कि असत्य तथ्यों के आधार पर किसी व्यक्ति को झूठे मामले में न फंसाया जाए। विवेचक लिपिक की तरह काम न करें।