फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: बजट नहीं आने व विभागीय सुस्ती से नहीं बदल सकी स्कूलों की सूरत

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। परिषदीय विद्यालयों को बेहतर रूप देने के प्रयास तो शुरू किए गए लेकिन बजट न आने और विभागीय सुस्ती की वजह से कार्य अधर में लटक गए। विगत वर्ष पीलीभीत के 10 परिषदीय विद्यालयों की सूची शासन को सौंपी गई थी। इन स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित किया जाना था पर ऐसा नहीं हो सका।
विज्ञापन


प्रदेश के सरकारी स्कूलों का जिक्र आते ही जेहन में जर्जर भवन, जमीन पर बैठे विद्यार्थी और खाली पड़ी शिक्षकों की कुर्सियों की तस्वीर सामने आती है। ऐसे में तमाम योजनाओं के जरिये स्कूलों का कायाकल्प करने की दिशा में कार्य शुरू किया गया। परियोजना निदेशालय ने बेसिक शिक्षा विभाग से जिले के 10 ऐसे विद्यालयों की सूची मांगी थी, जिनका कायाकल्प कराए जाने की आवश्यकता थी।
विभाग की ओर से जिले के ऐसे स्कूल चिह्नित कर शासन को सूची भेज दी गई लेकिन कभी बजट में देरी तो कभी कार्यदायी संस्था की सुस्ती के कारण यहा कार्य अधर में लटक गया।
विज्ञापन



इन स्कूलों की बदली जानी थी तस्वीर

बेसिक शिक्षा विभाग ने परियोजना निदेशालय को जिन 10 स्कूलों की सूची भेजी थी, उनमें गौरिया, बिलसंडा, खजुरिया पचपरा, पूरनपुर के प्राथमिक विद्यालय वहीं गिद्धौर, गौनेरी बदी, खासपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल थे।


बजट भी कर दिया गया था निर्धारित
इन स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित करने के लिए अलग-अलग बजट भी निर्धारित कर दिया गया था। इसमें किसी स्कूल के लिए आठ तो किसी के लिए नौ लाख रुपयों का बजट निर्धारित किया गया था। यह और बात है कि धरातल में योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी।
विज्ञापन



10 स्कूलों की सूची भेजी गई थी। आचार संहिता की वजह से कार्य रुक गया। दो माह के भीतर कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
-अमित कुमार सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें