बरेली/फरीदपुर। फरीदपुर के सिमरा केशोपुर गांव में संचालित गोशाला में गोवंशों को संरक्षण नहीं मिल पा रहा है। 78 गोवंशों की क्षमता वाली गोशालाओं में 190 गोवंश भर दिए गए हैं। यहां पर बिजली का कनेक्शन तक नहीं है। अधिकारी गोशाला का निरीक्षण करने आते हैं, लेकिन उन्हें दर्द नजर नहीं आता है।
जिले में 104 गोशालाएं हैं। इसमें 17418 गोवंश हैं। इनमें नगर निगम की सीबीगंज के पास नदौसी में बनी गोशाला सबसे बड़ी है। यहां करीब 1600 गोवंश है। हालांकि यहां क्षमता करीब एक हजार पशुओं की ही है। यह हाल सभी गोशालाओं का है। जहां क्षमता से ज्यादा ठूंस कर पशुओं को रखा गया है। फरीदपुर के सिमरा केशोपुर गांव की गोशाला का भी यही हाल है। क्षमता से दोगुने से भी ज्यादा 190 पशु यहां हैं। गोवंश को खिलाने के लिए भूसा, हरा चारा और चोकर की पर्याप्त व्यवस्था का दावा किया जा रहा है। गोआश्रय स्थल में अभी तक विद्युत कनेक्शन नहीं कराया गया है। गाेवंश के लिए पानी की व्यवस्था करने के लिए जेनरेटर से एक बार सबमर्सिबल चलाया जाता है।
जिले में बन रहीं 13 और गोशालाएं
गोवंश को देखते हुए जिले की गोशालाओं में जगह कम पड़ने लगी है। इसी को देखते हुए जिले में 13 नई गोशालाएं बनाई जा रहीं हैं। इनमें 10 स्थलों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। जुलाई तक इनके पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। कार्यदायी संस्था को बजट भी जारी हो चुका है।
यहां बन रहे स्थल
आंवला में अनिरुद्धपुर, मऊचंदपुर, सिकोड़ा गांव में, फरीदपुर के शेखापुर, करतौली गांव में, क्यारा में मानपुर अहियापुर, बहेड़ी के अम्बरपुर, बांसबोझ, मीरगंज के चुरई दलपतपुर, भोजीपुरा के महेशपुर शिवसिंह गांव में गोशाला का निर्माण चल रहा है। जबकि बिथरीचैनपुर के दासपुर,नवाबगंज के मधुनगला, फरीदपुर वीरपुर मेहतरपुर गांव में अभी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. मेघ सहाय ने बताया कि इन स्थलों के बनने पर जिले में गोवंश को रखने में कोई दिक्कत नहीं होगी। 2500 से ज्यादा पशु इन गोआश्रय स्थल में आ जाएंगे। - मेघ सहाय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी