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Bareilly News: पर्दा डालकर बना दिया बाथरूम... बेपर्दा हुई अव्यवस्था

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बरेली। प्रदेश स्तरीय महिला हैंडबाल व बास्केटबाल प्रतियोगिता की मेजबानी ने अव्यवस्थाओं की पोल खोल दी। जिम्मेदारों ने टिनशेड के नीचे पर्दा डालकर खिलाड़ियों के लिए बाथरूम तैयार कर दिया, पर व्यवस्था बेपर्दा हो गई। स्टेडियम में आपात स्थिति से निपटने के लिए न तो कोई एंबुलेंस दिखी, न ही चिकित्सक। इस पर संबंधित विभाग और जिम्मेदारों को भले ही न शर्म आए, लेकिन शुभारंभ समारोह में पहुंचे सांसद छत्रपाल गंगवार ने इस दर्द को महसूस किया। उन्होंने खिलाड़ियों से असुविधा के लिए माफी भी मांगी।
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डोरीलाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में 18 मंडलों से हैंडबाल की 18 व बास्केटबाल की 14 टीमें शामिल हुई हैं। इन छात्राओं को रोकने की व्यवस्था तीन कॉलेजों में की गई है। अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार को रिक्खी सिंह इंटर कॉलेज में व्यवस्था की खामियां उजागर की थीं। इसके बाद सांसद छत्रपाल गंगवार ने सुबह उद्घाटन समारोह में छात्राओं से माफी मांगते हुए व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने की बात कही थी। हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम शुक्रवार शाम गुरु गोविंद सिंह इंटर कॉलेज पहुंची तो कई अव्यवस्थाएं सामने आईं।
खिलाड़ियों ने बताया कि विभाग की ओर से कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। बाथरूम ठीक नहीं हैं। टिन शेड में पर्दा डालकर नहाने की व्यवस्था की गई है। कुछ दूर पर ही छोटे बच्चों की कक्षाएं लगती हैं। नहाने के स्थान पर चारों ओर गंदगी फैली हुई है। पानी का भी समुचित इंतजाम नहीं है।
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शौचालय में न पानी, न कुंडी
गुरु गोविंद सिंह इंटर कॉलेज में 80 से अधिक खिलाड़ियों को रोका गया है और शुक्रवार सुबह ही दो मोबाइल शौचालय मंगाए गए हैं। उनमें भी न तो कोई बल्ब है, न पानी की व्यवस्था। एक में तो कुंडी ही टूटी मिली। रस्सी के सहारे दरवाजे को टिकाने का जुगाड़ किया गया था। इसी कारण कुछ खिलाड़ी स्टेडियम में ही नहाने जाती हैं।
चिकित्सा व्यवस्था भी नहीं
अलग-अलग जिलों से आए खिलाड़ियों और टीम मैनेजर ने बताया कि हैंडबाल खेलते हुए अक्सर खिलाड़ी गिरकर जख्मी हो जाती हैं। इसके बावजूद आपात स्थिति के लिए न तो कोई एंबुलेंस की व्यवस्था कराई गई है, न ही प्राथमिक इलाज के लिए मैदान में कोई चिकित्सक मौजूद रहता है। ठहरने की व्यवस्था भी दूर कराई गई है। रात में स्टेडियम से वापस जाने के दौरान सुरक्षा का भी डर बना रहता है। संवाद
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