पीलीभीत में जांच की जिम्मेदारी डीएम को सौंपी, कई लेखपालों पर लटकी तलवार
पीलीभीत। बरेली-सितारगंज हाईवे के लिए भू-अधिग्रहण के दौरान हुए घोटाले की जांच अब स्थानीय स्तर पर जिलाधिकारी को सौंपी गई है। अब संदिग्ध बैनामों और भू उपयोग में बदलाव की जांच की जाएगी। इस निर्देश के बाद राजस्व और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियाें और कर्मचारियों में खलबली मची है। सूत्रों के मुताबिक लेखपालों ने प्रति लाख मुआवजे पर 20 हजार रुपये कमीशन तय कर रखा था। इसी की आड़ में घपला किया गया। ऐसे लेखपालों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
मंडलायुक्त की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद कई खुलासे हुए हैं। सर्वे करने वाले राजस्व, एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के नाम सामने आ गए हैं। अधिसूचना के बाद बैनामे कराने और भू उपयोग बदलवाने के खेल का भी खुलासा हुआ है। जिन भूखंडों पर खेती हो रही थी, उस पर भी आधे-अधूरे निर्माण कराकर मुआवजा हड़पने की पुष्टि हुई है। नाम न छापने की शर्त पर कई किसानों ने नाम लेकर बताया कि सर्वे से पूर्व लेखपालों ने न सिर्फ अधिक मुआवजा लेने का तरीका बताया, बल्कि 20 फीसदी कमीशन भी तय किया था। संवाद
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जांच संबंधी निर्देश अभी आए नहीं हैं। हो सकता है कि सोमवार तक निर्देश आ जाएं। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। - संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी, पीलीभीत