मंदिर, मस्जिद या मजार बनाने पर किसी को आपत्ति नहीं है, मगर धर्म की आड़ में सरकारी जमीन पर अनाधिकृत तरीके से कब्जा करने की होड़ मची है। मानसिक चिकित्सालय के सामने बरेली कालेज की दीवार से सटकर नगर निगम की संपत्ति पर बीडीए से बिना नक्शा स्वीकृत कराए मंदिर और मस्जिद दोनों बन गए। अब इनकी आड़ में दुकानें और गैराज चल रहे हैं। बरेली कालेज के पश्चिमी गेट चौराहे पर पीपल और बरगद के पेड़ थे। इनकी आड़ में मंदिर और मठिया बन गए। अब यहां फोटो स्टेट और स्टेशनरी की दुकानें चल रही हैं। रोजाना जाम लगता है। ये अतिक्रमण देखने की फुर्सत न तो नगर निगम को है, न बीडीए को।
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बरेली कालेज की दीवार से सटी मस्जिद बनी है। जो गुलजार वाली मस्जिद के नाम से मशहूर है। इस मस्जिद में नमाज पढ़ने बहुत ज्यादा संख्या में लोग नहीं आते। जगह भी नहीं है। मस्जिद की आड़ में बनी दुकान में गैराज जरूर चल रहा है। सड़क और कालेज के बीच की जमीन नगर निगम की है। 2001 में नगर निगम ने रामपुर गार्डन से श्यामगंज चौराहे तक नाला निर्माण स्वीकृत किया था। दुकानों और मंदिर मस्जिद के पक्के अतिक्रमण के कारण ये प्रयास दम तोड़ गया। आज तक नाला पूरा नहीं बन सका।
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बरेली कालेज के पश्चिमी गेट चौराहे पर पीपल और बरगद के पेड़ थे। पहले दुर्गा मां का मंदिर बना। फिर दो छोटे मंदिर बनाकर देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित कर दीं। अब इस मंदिर की आड़ में अवैध कब्जे की होड़ मची है। मंदिर के बगल में ही पक्की दुकान बन गई जिसमें कमल फोटो स्टेट के नाम से दुकान चलती है। दूसरी ओर ट्रांसफार्मर की आड़ में टीन शेड बनाकर स्टेशनरी की दुकान सड़क पर लगने लगी। सड़क के दोनों ओर दो जूस और दो चाट के ठेले लगते है। ठीक कालेज गेट पर चार खोखे भी अनाधिकृत तरीके से रखे हैं। इनमें एक विद्यार्थी फोटो स्टेट के नाम से है जबकि दूसरे पर कोई नाम नहीं लिखा है।
‘गुलजार वाली मस्जिद हमारे दादा ने बनाई थी। हम उसमें मुतवल्ली हैं। इसमें हमारा ही गैराज चलता है। मस्जिद काफी पुरानी है। ये जमीन किसी की नही है। मस्जिद की है।’ शरीफ भाई, मुतवल्ली मस्जिद
‘पहले के जो जिम्मेदार लोग थे, उन्होंने अतिक्रमण हटाने पर ध्यान नहीं दिया। हम अभियान चला रहे हैं। पहले अस्थाई अतिक्रमण हटा रहे हैं। इसके बाद पक्के और धर्मस्थलों के आस-पास अतिक्रमण हटाने की योजना बनाएंगे। ये गलत है और निश्चित तौर पर हटना चाहिए।’ विकास सेन, सहायक नगर आयुक्त
‘धार्मिक स्थलों की आड़ में अतिक्रमण करना पूरी तरह गलत है। इसे हटाने की योजना बनती है लेकिन इसमें अन्य विभागों का समन्वय नहीं हो पाता। इसलिए ये अतिक्रमण हटने से रह जाते हैं। जहां कहीं भी धार्मिक स्थलों की आड़ में अतिक्रमण होंगे, उनको पुलिस की मदद से हटाने की रणनीति तैयार की जाएगी।’ डा. शशांक विक्रम सिंह, उपाध्यक्ष बीडीए
यह मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। नगर निगम की जमीन है। कालेज की जमीन पर जब अतिक्रमण हुआ था तो शासन को लिखा था- डॉ. सोमेश यादव, प्राचार्य, बरेली कालेज