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Bareilly News: टैक्स में छूट और उद्योगों को सहूलियतों की दरकार

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बरेली। केंद्र सरकार बृहस्पतिवार (एक फरवरी) को अंतरिम बजट पेश करने जा रही है। आगामी लोकसभा चुनाव के चलते तमाम लोगों को बजट के ''''चुनावी'''' होने की उम्मीद है, पर विशेषज्ञों के मुताबिक इस बजट से खास राहत और बड़ी घोषणाएं होने की संभावना कम है। आमजन की उम्मीद टैक्स की छूट सीमा को और बढ़ाए जाने तथा पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य वाली सरकार से उद्योगों की स्थापना के लिए सहूलियतें मिलने की दरकार है।
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उम्मीदें और मांगें
- महिला और वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर छूट सीमा में वृद्धि हो। नई और पुरानी व्यवस्थाओं में कम से कम 50 हजार रुपये तक।
- बचत बढ़ाने के लिए धारा 80 सी (पुरानी व्यवस्था) के तहत कटौती में दो लाख तक वृद्धि की उम्मीद। फिलहाल डेढ़ लाख लिमिट है।
- कंपनी, साझेदारी, सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) के बीच टैक्सेशन दर में समानता हो। पेट्रोल, डीजल, बिजली जीएसटी दायरे में हों।
- एमएसएमई को देय राशि भुगतान के वित्तीय वर्ष में आय विवरण दाखिल करने की तारीख से पहले भुगतान पर कटौती।
- धारा 80-आईए विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी एमएसएमई को नई यूनिट स्थापना पर कर लाभ मिलना।
- रियल एस्टेट सेक्टर के लिए होम लोन पर चुकाए ब्याज के लिए कटौती की सीमा न्यूनतम तीन लाख रुपये तक बढ़े। वर्तमान में दो लाख है।
- आयकर में टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) प्रणाली को सरल बनाना।
- प्रत्येक राशन कार्ड धारक को आयुष्मान कार्ड मिलने, स्वास्थ्य बीमा योजना धारित व्यक्ति को किसी भी अस्पताल में इलाज मिले।
- महिला सशक्तीकरण, सुरक्षा के लिए संचालित योजना को और सक्रिय करना, कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण केंद्र।
- किसानों को खाद पर अनुदान, बिजली बिल से राहत, फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़े और वैश्विक बाजार मिले।


फोटो : बातचीत
बचत बढ़ाने के लिए हों छूट के नए प्रावधान
इस बार के बजट में माल का भुगतान के समय रिटर्न फाइल करने तक प्रस्तावित होना जरूरी है। क्योंकि यह उद्यमियों के लिए कारोबार में अड़चन बन रहा है। बचत को बढ़ावा देने के लिए नए छूट का प्रावधान भी होना चाहिए। -सीए मोहित टंडन, अध्यक्ष, आईसीएआई, बरेली

नोटिस नहीं, सूचित करने का नियम हो
एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि बैंकों के लिए भी कुछ नियम बनाए जाएं। ताकि लोगों को चक्कर न काटने पड़ें। जीएसटी के पुराने मामलों में नोटिस के बजाय व्यापारी को सूचित करने का नियम होना चाहिए। - राजेंद्र गुप्ता, प्रांतीय महामंत्री, उप्र उद्योग व्यापार मंडल
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आयकर से पूरी तरह मुक्त हों वरिष्ठ नागरिक
60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को आयकर से पूरी तरह छूट मिलनी चाहिए। वरिष्ठजन की सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा के लिए भी नियम बनाने चाहिए। बुजुर्गों के प्रति सभी सरकार चिंता तो जताती है, पर करता कोई कुछ नहीं है। - डॉ. महेंद्र कुमार सक्सेना, अध्यक्ष, वरिष्ठ नागरिक संगठन

कम हो सकता है आय पर कर का बोझ
अंतरिम बजट भी युवाओं और व्यापारियोें के लिए खास हो सकता है। करदाताओं के लिए इनकम टैक्स की धारा 80 की लिमिट बढ़ाई जा सकती है। पुरानी, नई टैक्स स्लैब की छूट सीमा में बढ़त, आय पर टैक्स का बोझ कम हो सकता है। - आशीष सक्सेना, एडवोकेट, जीएसटी, आयकर

बड़ी घोषणा की उम्मीद बहुत कम
अंतरिम बजट होने की वजह से इसमें कोई बड़ी घोषणा होने की उम्मीद कम है। पर इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त बजट का अनुमोदन हो सकता है। चल रही योजनाओं को और बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। - तनुज भसीन, चेयरमैन, आईआईए, बरेली चैप्टर

डायग्नोसिस में एआई को मिले बढ़ावा
आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए सरकार प्रयासरत है। आभा आईडी से लोगों को लाभ मिला है। डायग्नोसिस में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) यानि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने, विशेषज्ञ चिकित्सकों को सहूलियत की घोषणा की उम्मीद है। - डॉ. सुधीर गर्ग, पूर्व सीएमओ बरेली

मिल सकती है कुछ रियायत
बजट से बहुत राहत की उम्मीद नहीं है। कर और कुछ मामलों में रियायत मिल सकती है। महिलाओं, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों पर जोर हो सकता है। 2024 में एआई एकीकरण और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर रणनीतिक फोकस से प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। -प्रो. शिखा, अर्थशास्त्र, बरेली कॉलेज


रोजगार के क्षेत्र में विस्तार की संभावना
बजट से युवाओं को अधिक उम्मीद है। खेल के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की उम्मीद है। डिजिटल पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है। साथ ही रोजगार के क्षेत्र में भी विस्तार मिलने की संभावना है। - शिवम दिवाकर, छात्र, एमए अर्थशास्त्र


ई-लर्निंग पर ध्यान देने की जरूरत
शिक्षा व्यवस्था में और सुधार होना चाहिए। महिलाओं की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। टेक्नोलॉजी का अहम किरदार है। ऐसे में ई-लर्निंग को प्रमोट किया गया है। इस पर भी ध्यान देना चाहिए। रोजगार मिलने की उम्मीद है। - अरिजा फातिमा, छात्रा, एमए अर्थशास्त्र
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