बरेली। सामान्य अवस्था में भी पांव सुन्न होना, सूजन, दर्द, नसों का फूलना, धमनियों में खिंचाव आदि लक्षण नजर आएं तो हल्के में न लें। यह लेग अटैक के शुरुआती लक्षण हैं। समय पर इलाज न हो तो भविष्य में पांव तक काटने की नौबत आ सकती है।
यह जानकारी शनिवार को एक निजी होटल में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान दिल्ली के एक निजी अस्पताल के वरिष्ठ वैस्कुलर सर्जन कमांडर डॉ. वीएस बेदी ने दी। बताया कि देश में करीब छह करोड़ डायबिटीज के मरीज हैं। इनमें से छह फीसदी के गैंगरीन के चपेट में आने की आशंका है। 30 साल पहले इसकी चपेट में आने पर पांव काटने की नौबत होती थी पर अब समय पर बीमारी का पता चलने पर महज छोटा सा चीरा लगाकर स्टंट डालकर रक्त प्रवाह सामान्य कर सकते हैं। यह 99 फीसदी सफल है।
उन्होंने न्यूरो, किडनी, डायलिसिस आदि समस्याओं और उनके इलाज की जानकारी दी। दिल्ली से आए डॉ. अजय यादव, डॉ. ध्रुव अग्रवाल, डॉ. संदीप अग्रवाल ने भी विषय संबंधी जानकारी दी। रविवार को आईएमए भवन में निशुल्क जांच और परामर्श कैंप लगेगा। प्रेसवार्ता के दौरान आईएमए के साइंटिफिक एडवाइजर डॉ. अतुल अग्रवाल, आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजीव गोयल, सचिव डॉ. गौरव गर्ग, कोषाध्यक्ष डॉ. निकुंज गोयल, कम्युनिटी सर्विस चेयरमैन डॉ. एसपी अग्रवाल व अन्य मौजूद रहे।