बरेली। भोजीपुरा में टक्कर मारकर दरोगा की जान लेने वाले वाहन की पहचान करने में पुलिस जी-जान से जुटी है। गश्त में दरोगा के साथ मौजूद सिपाही बलेनो कार के टक्कर मारने की बात कह रहे हैं। वह कार की एक झलक ही देख पाए थे। उन्हें कार हरियाणा के नंबर की होने का अंदेशा है। सिपाहियों का कहना है कि कार सवार आसपास के इलाके से अच्छी तरह वाकिफ रहे होंगे, तभी वह साफ बचकर निकल गए।
दरोगा संजय सिंह के साथ गश्त कर रहे सिपाहियों ने अफसरों को जो बताया, उसके मुताबिक हरियाणा नंबर की बलेनो कार लग रही थी। रात में ही वायरलेस से सूचना देकर नाकेबंदी कराई गई, लेकिन कार का पता नहीं लग सका। उम्मीद थी कि घटनास्थल से करीब तीन किमी दूर टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरों से गाड़ी की पहचान हो जाएगी पर इस तरह की कार के वहां से निकलने का साक्ष्य भी नहीं मिल सका। इससे साफ है कि कार में सवार लोग इलाके के रास्तों से अच्छी तरह परिचित रहे होंगे। टोल से पहले घंघोरा पिपरिया मार्ग है, इसे अक्सर वाहन चालक टोल से बचने के लिए बरेली आने-जाने को इस्तेमाल करते हैं। संभावना है कि कार भी इसी रास्ते से गई थी। इसके साथ ही मझउआ और अभयपुर रोड होकर भी दूसरे कस्बों को निकला जा सकता है।
खनन माफिया की तलाश में गई थी संयुक्त टीम
भोजीपुरा में बिलवा आदि इलाकों में अवैध खनन किया जाता है। दो दिन पहले थाना क्षेत्र के घंघोरा में एसडीएम सदर प्रत्यूष पांडेय ने खनन माफिया पर बड़ी कार्रवाई की थी। वहां साठ बीघा जमीन में अवैध खनन होता मिला। एसडीएम ने पोकलैंड, जेसीबी समेत कई वाहन पकड़े थे। बाद में पुलिस को बुलाकर वाहन उसके हवाले कर लिखा-पढ़ी कराई थी। बताते हैं कि हादसे से पहले सोमवार रात फिर खनन की सूचना पर एसडीएम सदर टीम के साथ घंघोरा पहुंचे थे। खनन अधिकारी और पुलिस को भी साथ लिया गया था, हालांकि सफलता नहीं मिली तो टीम लौट आई।
भोजीपुरा में सक्रिय हैं पशु तस्कर भी, निलंबित हुए थे इंस्पेक्टर
भोजीपुरा इलाके के कई गांव पशु तस्करी के लिए भी चर्चित हैं। यहां अक्सर रात में पशु तस्करों की गाड़ियां दौड़ती हैं। सात सितंबर को सैदपुर चुन्नीलाल गांव के पास बीस पशुओं के अवशेष मिले थे जिसके बाद इज्जतनगर और भोजीपुरा पुलिस सीमा विवाद में उलझ गई थी। अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया था। योगी सेना के हिमांशु पटेल ने अधिकारियों को ट्वीट कर शिकायत की थी। जांच के बाद एसएसपी ने भोजीपुरा इंसपेक्टर अश्विनी कुमार, एक दरोगा व तीन सिपाहियों को निलंबित किया था। इससे पहले भी पशु तस्कर पुलिसकर्मियों पर हमला कर चुके हैं। नौ सितंबर 2015 को फरीदपुर में पशु तस्करों ने दरोगा मनोज मिश्र की गोली मारकर हत्या कर दी थी।