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Bareilly News: स्नातक में पर्यावरण विषय की पढ़ाई होगी अनिवार्य

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यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र
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नई दिल्ली। इंजीनियरिंग, मेडिकल, आर्किटेक्चर, फार्मेसी, मैनेजमेंट समेत अन्य सभी स्नातक कार्यक्रमों के छात्रों को पर्यावरण विषय की पढ़ाई करनी अनिवार्य होगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की सिफारिशों के तहत पर्यावरण शिक्षा पर आधारित पाठ्यक्रम की पढ़ाई अनिवार्य कर दी है। इसमें पढ़ाई के साथ छात्रों को केस स्टडी के साथ फील्ड में भी जाकर काम करना होगा।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव प्रोफेसर मनीष जोशी ने इस संबंध में सभी राज्यों और विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा है। इसमें लिखा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में पर्यावरण शिक्षा को पाठ्यक्रम में सबसे जरूरी माना गया है। यूजीसी ने पर्यावरण शिक्षा को लेकर विशेषज्ञों की मदद से पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसे सामुदायिक जुड़ाव, सेवा, पर्यावरण शिक्षा और मूल्य-आधारित शिक्षा के आधार पर तैयार किया गया है। इसका मकसद छात्रों को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाना है।
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एक सेमेस्टर में एक क्रेडिट हासिल करना जरूरी
स्नातक प्रोग्राम के पाठ्यक्रम में 9 विषयों को शामिल गया हैं। कुल 30 घंटों की क्लासरूम स्ट्डी में एक विषय चार घंटे तो अन्य छह-छह घंटों के हैं। इसके कुल चार क्रेडिट होंगे। पर्यावरण शिक्षा के पाठ्यक्रम में जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, जैविक विविधता का संरक्षण, जैविक संसाधनों और जैव विविधता का प्रबंधन, वन और वन्य जीवन संरक्षण और सतत विकास जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। छात्रों को केस स्टडी के साथ फील्ड वर्क भी करना होगा। एक सेमेस्टर में एक क्रेडिट हासिल करना जरूरी होगा। अमर उजाला ब्यूरो
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