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Bareilly: आवारा कुत्तों ने चार साल के बच्चे को मार डाला, नोच खाया मांस; खेत पर मां के पास जा रहा था मासूम

Wed, 15 Nov 2023 07:48 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में आवारा कुत्तों ने फिर एक मासूम बच्चे की जान ले ली। शेरगढ़ में रविवार शाम अपनी मां के पास खेत पर जा रहे चार साल के बच्चे पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। उसे बुरी तरह नोच डाला, जिससे उसकी मौत हो गई। 
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दक्ष का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली के शेरगढ़ इलाके में पशुओं के लिए चारा लेने गई मां और बड़े भाई के पास जा रहे चार वर्षीय मासूम को आवारा कुत्तों ने मार डाला। उसे जगह-जगह काटा और मांस भी नोच खाया। घटना के बाद मां तुरंत ही उसे लेकर निजी अस्पताल पहुंची, जहां जांच के बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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शेरगढ़ के मोहल्ला शिव मंदिर निवासी छेदालाल की पत्नी सरोज कुमारी ने बताया कि रविवार शाम उनके पति बाजार गए थे। सात वर्षीय बेटे आनंद को साथ लेकर वह पशुओं के लिए चारा लेने खेतों की ओर गईं थीं। छोटा बेटा दक्ष घर में अकेला था। उन्हें लौटने में देर हुई तो दक्ष उनकी तलाश में खेतों की ओर चल दिया। गांव निवासी कुलदीप के गन्ने के खेत के पास मौजूद आवारा कुत्तों के झुंड ने घेरकर उस पर हमला कर दिया। जगह-जगह से मांस नोचकर खा गए।

 

वहां से गुजर रहे दूसरे बच्चे ने दक्ष को लहूलुहान हालत में पड़ा देखा तो खेत पर जाकर सरोज कुमारी को इसकी सूचना दी। वह तुरंत ही घटनास्थल पर पहुंचीं। दक्ष को लेकर वह कस्बे के निजी अस्पताल पहुंचीं। जांच के बाद डॉक्टर ने दक्ष को मृत घोषित कर दिया। सरोज ने बताया कि दक्ष तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर का था। वह जनता शिशु निकेतन में कक्षा एक का छात्र था।
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सीबीगंज में चार बच्चों की जान ले चुके हैं कुत्ते
सीबीगंज थाना क्षेत्र में आवारा कुत्ते अब तक चार बच्चों की जान ले चुके हैं। इसके अलावा 15 बच्चों और कुछ वयस्कों को भी काटकर जख्मी कर चुके हैं। हर मौत के बाद नगर निगम की टीम कुत्तों को पकड़ने की खानापूरी करती है।

सीबीगंज के गांव बंडिया में मांस के अवशेष खुले में फेंकने से कुत्ते आदमखोर बन गए हैं। इन कुत्तों का झुंड आए दिन बच्चों पर हमला कर उन्हें घायल कर देता है। अभी कुछ दिनों से कुत्तों के हमले रुके जरूर हैं पर पहले वे गांव के मोरपाल (6), रोहनी (7), परी और अयान की जान ले चुके हैं। कुत्तों के हमले उस वक्त होते हैं जब बच्चे घर के बाहर खेल रहे होते हैं या खेत पर अकेले होते हैं। इसे लेकर आसपास के गांव के लोगों में आक्रोश व्याप्त रहता है। 
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