जलकल व जल निगम ने भूजल बचाने के लिए बनाई योजना, महापौर ने विकसित भारत की योजना बताया
बरेली। भूजल को बचाने के लिए जलकल व जलनिगम ने संयुक्त रूप से एसटीपी से शोधित पानी की बिक्री की योजना बनाई है। इसमें 32 एमएलडी शोधित पानी की प्रतिदिन बिक्री की जाएगी। इसके लिए निर्माण करने वाली एजेंसियों से बातचीत चल रही हैं। इसके अलावा सिंचाई के लिए भी इस पानी का उपयोग किया जाएगा। महापौर उमेश गौतम ने इसे विकसित भारत की योजना बताया है।
स्वतंत्रता दिवस पर महापौर उमेश गौतम व नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने वार्ड 38 बेनीपुर चौधरी में सराय तल्फी स्थित दो साल से चालू एसटीपी के शोधित सीवेज फिलिंग स्टेशन का लोकार्पण किया था। फिलिंग स्टेशन से शोधित सीवेज का इस्तेमाल शहर में पानी के छिड़काव, पेड़ पौधों को पानी देने, भवन निर्माण समेत अन्य कार्याें में किया जाएगा। इसको लेकर नगर निगम प्रशासन समेत जलकल व जलनिगम निर्माण करने वाली एजेंसियों से बात की जा रही है। इन कामों में शाेधित पानी का इस्तेमाल होता है तो भूजल का इस्तेमाल कम होगा और पानी की भी बचत कम होगी। इसके अलावा जलकल विभाग की भी आमदनी में इजाफा होगा।
- टैंकरों के माध्यम से होगी सप्लाई
सिंचाई और निर्माण कार्याें के लिए शोधित पानी के लिए टैंकरों से पानी की सप्लाई की जाएगी। अभी नगर निगम से तीन हजार रुपये में प्रतिदिन एक वाटर टैंक मिलता है, शोधित पानी के बाद यह रकम भी कम होने की उम्मीद हैं, हालांकि इसकी अधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की गई है। इसके अलावा नगर निगम से ठेका लेने वाली फर्में भी इसी पानी का अब से इस्तेमाल करेंगी, जिसको वह निगम से खरीदेंगे। वहीं नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने भी अधिक से अधिक लोगों से पानी खरीदने की अपील की है।
- पीने योग्य नहीं, अन्य कामों में हो सकता है इस्तेमाल
महापौर उमेश गौतम ने कहा कि एसटीपी से शोधित होने वाला पानी पीने के योग्य नहीं है, लेकिन अन्य आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जल निगम की तरफ से चार एसटीपी बनाए गए हैं। इसमें सबसे बड़ा एसटीपी नेकपुर में है, जहां से रोजाना 35 एमएलडी सीवर रोजाना शोधित हो रहा है। इसके अलावा भी अन्य एसटीपी से पानी शोधित किया जा रहा है। संवाद